आज का युवा मुस्कुराता जरूर है लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट चुका है। सोशल मीडिया पर “खुश हूं” दिखाता है, पर असल में सुकून कहीं खो गया है। रिश्ते अब दिल से नहीं, मोबाइल से बनते हैं और एक “Seen” पर खत्म हो जाते हैं।
माता-पिता और दादा-दादी की सच्ची बातें आज उसे पुरानी लगती हैं, पर कल वही आवाज उसे रुलाएगी। आज का युवा जरूरत के लिए नहीं बल्कि दिखावे के लिए जी रहा है-लोन पर जिंदगी, उधार पर शौक और ब्याज पर सपने लेकर नई-नई गाड़ियां, महंगे फोन, ब्रांडेड कपड़े और फैशन के नाम पर सब कुछ खरीद रहा है, सिर्फ इसलिए ताकि दुनिया उसे देखकर वाह-वाह करे।
लेकिन हकीकत ये है कि जेब खाली है, कमाई अनिश्चित है और EMI का बोझ उसे अंदर ही अंदर तोड़ रहा है। यही दबाव धीरे-धीरे डिप्रेशन बनकर उसे खत्म करने लगता है और फिर वही सुकून सिगरेट, गुटखे और शराब में ढूंढा जाता है, जहां सुकून नहीं सिर्फ बर्बादी मिलती है।
इसी दिखावे और बढ़ते कर्ज का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को तोड़ देता है। घरों में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ने लगते हैं, रिश्तों में दरार आ जाती है, कई मामलों में तलाक तक की नौबत आ जाती है। और जब इंसान इन सब बोझों से घिर जाता है, तो कई बार गलत कदम उठाने तक मजबूर हो जाता है-जिसमें आत्महत्याएं जैसी दर्दनाक घटनाएं भी शामिल हैं।
इसलिए अब भी वक्त है संभल जाओ, क्योंकि जितना दिखाओगे उतना ही डूबोगे। इस नकली दिखावटी दुनिया से बाहर निकलो, सच्चाई को अपनाओ, अपने लोगों के साथ समय बिताओ।
याद रखो-असली अमीरी दिखावे में नहीं, बल्कि सुकून, सादगी और अपने दम पर खड़ी की गई जिंदगी में होती है…
वरना एक दिन सब कुछ होते हुए भी अंदर से खाली रह जाओगे।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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