दैनिक केसरिया हिंदुस्तान संवाददाता वीरू गौतम
मीटर बदलते ही कई गुना बढ़े बिजली बिल, किसानों ने उठाई निष्पक्ष जांच और राहत की मांग — समाधान न हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
पीलीभीत।बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब बड़े विवाद का कारण बनते जा रहे हैं। इसी को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अप्रत्याशित और कई गुना बढ़ोतरी हो रही है, जिससे किसानों और आम लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ज्ञापन में बताया गया कि जिले के विभिन्न गांवों में पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए गए। मीटर बदलने के बाद उपभोक्ताओं को जो बिजली बिल प्राप्त हुए, वे पहले के मुकाबले काफी अधिक हैं। किसानों का कहना है कि उनके बिजली उपयोग में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है, इसके बावजूद बिलों का बढ़ना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं तकनीकी गड़बड़ी या डेटा रिकॉर्डिंग में गंभीर त्रुटि हो रही है।
भारतीय किसान यूनियन (भानु) के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं है और उपभोक्ताओं को बिना स्पष्ट कारण के आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है और लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसानों ने यह भी कहा कि कई उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके बिल अचानक इतने बढ़ गए कि उन्हें भुगतान करना मुश्किल हो गया है।
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बढ़े हुए बिलों के पीछे वास्तविक कारण क्या है। साथ ही जिन उपभोक्ताओं के बिल असामान्य रूप से बढ़े हैं, उन्हें तत्काल राहत दी जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
किसान यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों पर इस तरह का अतिरिक्त बोझ असहनीय है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला अब जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है। एक ओर जहां सरकार स्मार्ट मीटर को आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था बता रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर उठ रहे सवाल इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस बढ़ते विवाद को किस तरह सुलझाता है और किसानों को कब तक राहत मिलती है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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