धर्मेंद्र गुप्ता की रिपोर्ट
ग्यारसपुर विकासखंड के ग्राम मनोरा में आज नरवाई (फसल अवशेष) न जलाने के संबंध में एक जागरूकता चैपाल का आयोजन किया गया। चैपाल में किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले दुष्परिणामों तथा इसके वैकल्पिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।कार्यक्रम में उपस्थित कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नरवाई जलाने से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, साथ ही पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है और जीव-जंतुओं को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अतिरिक्त यह आगजनी की घटनाओं का कारण बनकर आसपास की फसलों एवं संपत्ति को भी खतरे में डाल सकती है।चौपाल में किसानों को समझाइश दी गई कि वे नरवाई को जलाने के बजाय उसे खेत में ही प्रबंधन के माध्यम से उपयोग करें, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही शासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे कृषि यंत्रों एवं योजनाओं की जानकारी भी साझा की गई अधिकारियों ने किसानों को यह भी अवगत कराया कि नरवाई जलाना प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए सभी किसान नियमों का पालन करते हुए पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।ग्रामीणों एवं किसानों ने चैपाल में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए आश्वासन दिया कि वे नरवाई नहीं जलाएंगे और अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। यह चैपाल पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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