बसंत पंचमी पर वैदिक मंत्रोच्चारण के श्लोको से आहुतियों से भर जाएगा हवन कुंड। भोजशाला में मां वाग्देवी की प्राण-प्रतिष्ठा हो, फिर वेद मंत्रों से गूंजे परिसर साधु-संत बोले

SHARE:

मनावर निजप्रतिनिधि:—–, धारा नगरी के ऐतिहसिक भोजशाला में मंगलवार को नियमित सत्याग्रह भक्ति और उसके माहौल में संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी की आराधना के लिए भोजशाला पहुंचे। मां की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं ने एक स्वर में स्तुति का गायन किया तथा हनुमान चालीसा का पाठ किया। मां वाग्देवी के जयकारों और भक्तों की मधुर स्वर लहरियों से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
भोज उत्सव समिति ने किया संतो का सम्मान
सत्याग्रह के पश्चात श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित की। वहीं गर्भगृह को नई-नवेली दुल्हन की तरह पुष्पों से सजाया गया था। कईओं ने मां वाग्देवी को चुनरी भी अर्पित की। वहीं सत्याग्रह के बाद बड़ी संख्या में संतों कर काफिला भोजशाला पहुंचा। संतों ने मां वाग्देवी की आरती कर पूजन-अर्चन किया। साथ ही भोज उत्सव समिति के सदस्यों का संतों ने सम्मान भी किया। इस दौरान माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंगलवार का दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष बन गया।
भोजशाला में मंगलवार को सत्याग्रह में बड़ी संख्या में बढ़ाल शामिल हुए और मां की स्तुति व हनुमान चालीसा का पाठ किया।
भोजशाला में हो मां वाग्देवी की प्राण-प्रतिष्ठा पुनः वेद अध्ययन प्रारंभ हो।
सत्याग्रह को संबोधित करते हुए उज्जैन के संत गोपाल कृष्ण महाराज ने कहा कि उन्होंने जहां-जहां कथा वाचन किया, वहां प्रभु से एक ही कामना की कि भोजशाला में मां वाग्देवी की प्राण-प्रतिष्ठा हो। उन्होंने कहा कि राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में. जिस स्वरूप में भोजशाला का निर्माण कराया था, उसी गौरव के साथ यह परिसर पुनः स्थापित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यहां पहले वेद अध्ययन की परंपरा थी, उसी प्रकार फिर से भोजशाला में वेद अध्ययन प्रारंभ होना चाहिए ताकि पूरा परिसर वेद मंत्रों से जायमान हो उठे।
उन्होंने कहा कि भोजशाला ज्ञान और साधना की पवित्र भूमि रही है। उन्होंने मुस्लिम समाज को कहा कि यदि वे भोजशाला में आना चाहते हैं तो गले में भगवा दुप‌ट्टा, माथे पर तिलक और धर्म बदल कर आ सकते है।
भोजशाला में बड़ी संख्या में संत पहुंचे और मां वाग्देवी के दर्शन के बाद यज्ञ कुंड में जयकारे लगाए।
मां वाग्देवी की आरती में शामिल हों, हम उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने परिसर में
स्थित हनुमानजी और भैरव महाराज का मंदिर का पुनर्निर्माण होना चाहिए। वहीं महामंडलेश्वर नरसिंह दास महाराज ने
कहा कि आने वाली बसंत पंचमी पर भोजशाला में भव्य महायज्ञ और मां वाग्देबी का अखंड पूजन
होना चाहिए।
मंगलवार को सत्याग्रह के बाद बड़ी संख्या में संत भोजशाला पहुंचे और मां वाग्देवी का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। संतों ने धार के हिंदू समाज के संघर्ष की सराहना करते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। इसके बाद भोज उत्सव समिति के सदस्यों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। संतों ने समिति के सदस्यों को भगवा दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर गोपाल शर्मा, अशोक जैन, हेमंत दौराया, विश्वास पाडे, सुमित चौधरी तथा राजेश शुक्ला सहित अन्य सदस्यों का सम्मान किया गया। इस दौरान भाजपा के जिलाध्यक्ष महंत निलेश भारती भी मौजूद थे।
सत्याग्रह किया
सत्याग्रह के पश्चात भोजशाला पहुंचे संतों में मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय ससंत समिति के संयुक्त महासचिव संतु राधे राधे भी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को शीघ्र पुनः स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने चार के हिंदू समाज के लंबे संघर्ष की सराहना करते हुए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि आगामी वसत पंचमी पर भोजशाला में पहले से अधिक भव्य और विशाल स्तर पर हवन-यज्ञ आयोजित किया जाएगा। उनका कहना था कि यज्ञ कुंड आहुतियों से भर जाए, ऐसा व्यापक आयोजन किया जाएगा, जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949

Leave a Comment

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई