शासकीय संपत्ति की बंदरबांट का आरोप: भवन तोड़े, सामान बेचा, जांच की मांग तेज

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(केसरिया हिंदुस्तान तोरण कुमार कबीरधाम)

कवर्धा: सहसपुर लोहारा जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंघनपुरी जंगल में शासकीय भवनों के ध्वस्तीकरण और नए निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-2 सिंघनपुरी जंगल एवं महावीर चौक स्थित दुर्गा मंच को जर्जर बताकर बिना आवश्यक अनुमति के तोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, भवनों से निकली खिड़कियां, दरवाजे, लोहे की छड़ें और अन्य उपयोगी सामग्री को बेच दिए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन भवनों को जर्जर घोषित कर ध्वस्त किया गया, उनके संबंध में न तो ग्राम सभा में स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार की सार्वजनिक सूचना प्रदर्शित की गई। इससे यह सवाल उठ रहा है कि भवनों को तोड़ने की अनुमति किस स्तर से प्राप्त की गई और ध्वस्तीकरण के दौरान निकली सामग्री का लेखा-जोखा कहां दर्ज किया गया।
मामले की सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि पुराने भवनों से निकले सामान का उपयोग या नीलामी संबंधी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि उपयोगी सामग्री को बेच दिया गया और उसका लाभ निजी तौर पर उठाया गया। यदि ऐसा हुआ है तो यह शासकीय संपत्ति के संरक्षण और उपयोग संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
विवाद यहीं नहीं थमता। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने भवनों को हटाने के बाद जो नया निर्माण कराया गया, उसमें नई सामग्री का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया। नए भवन में पुराने दरवाजे, खिड़कियां, गेट और अन्य जर्जर सामग्री लगा दी गई। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब पुराने और टूटे-फूटे सामान का ही उपयोग करना था तो फिर नए निर्माण के नाम पर खर्च की गई राशि का औचित्य क्या है।
स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण स्थल का निरीक्षण करने पर कई स्थानों पर पुरानी सामग्री का उपयोग स्पष्ट दिखाई देता है। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि निर्माण कार्य में लागत और सामग्री के नाम पर अनियमितता की गई हो सकती है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
गांव में एक और चर्चा का विषय पंचायत सचिव की लंबी पदस्थापना बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार सचिव वर्ष 2009 से लगातार इसी पंचायत में पदस्थ हैं। यदि यह तथ्य सही है तो इतने लंबे समय तक एक ही पंचायत में पदस्थ रहने के कारण कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहलू की भी अलग से जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित विभागों से मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्र एवं दुर्गा मंच को तोड़ने की अनुमति, ध्वस्तीकरण से प्राप्त सामग्री का विवरण, नए निर्माण में प्रयुक्त सामग्री तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि पुराने भवनों से निकली सामग्री कहां गई और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जर्जर भवनों की आड़ में शासकीय संपत्ति की बंदरबांट हुई है या फिर ग्रामीणों की आशंकाएं निराधार हैं? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल सिंघनपुरी जंगल पंचायत में उठे इन आरोपों ने स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है तथा ग्रामीण निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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