Mohan Gurjar
मंदसौर। गुर्जरबर्डिया चौपाटी स्थित विद्युत मंडल परिसर में आयोजित तीन दिवसीय “श्री नानीबाई का मायरा” कथा महोत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिन श्रद्धा, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पांडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण जयकारों एवं भक्ति रस से गूंज उठा।
परम पूज्य कथावाचक बालकदास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से नानीबाई के मायरे का भावपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए धर्म, संस्कार एवं जीव दया का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भजन-कीर्तन में झूमते नजर आए।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही 5 सुसज्जित बैलगाड़ियों की भव्य मायरा यात्रा। गुर्जरबर्डिया नरेश श्री सावलिया सेठ पारंपरिक मायरा लेकर ढोल-नगाड़ों एवं जयकारों के साथ कथा पांडाल पहुंचे। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा मायरे का भव्य स्वागत किया गया।
मायरे की मंगल बेला पर कई स्थानों पर ठंडे पानी, शीतल पेय एवं अल्पाहार की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने सेवा भाव से यात्रियों को ठंडा वितरित कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। वहीं अलग-अलग स्थानों पर आतिशबाजी एवं पुष्पवर्षा कर मायरा यात्रा का स्वागत किया गया।
महिलाओं ने मंगल गीत गाकर एवं आरती उतारकर पारंपरिक तरीके से मायरे का अभिनंदन किया। ढोल की थाप एवं “जय सावलिया सेठ” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
व्यास पीठ से बालकदास जी महाराज ने पक्षियों के लिए गर्मी के मौसम में जगह-जगह सकोरे लगाने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि “जीव मात्र में भगवान का वास होता है, जितना हो सके जीव दया रखो।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को पक्षियों के लिए पानी रखने हेतु सकोरे चाहिए, उन्हें पत्रकार मोहन गुर्जर द्वारा निशुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिसका सभी श्रद्धालु लाभ ले सकते हैं।
कथा के दौरान युवाओं से हेलमेट पहनकर वाहन चलाने की अपील की गई एवं गौशालाओं में सेवा एवं चारा दान करने का आग्रह भी किया गया।
यह भव्य मायरा यात्रा श्री राम सिंह जी गुर्जर पुत्र बबलू गुर्जर एवं पत्रकार मोहन गुर्जर की ओर से निकाली गई, जिसमें साक्षात प्रभु श्री सांवलिया सेठ साक्षी बने।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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