डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूत करने का विकल्प – राजेश सेतपाल

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दिलीप वर्मा
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
9424211900

तिल्दा नेवरा
चेंबर प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश
सेतपाल ने वैश्विक परिस्थितियों को नजर करते हुए डालर के मुकाबले रूपये को मजबूत करने पर अपने विचार दिए
डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूत करना केवल नारों या“स्वदेशी” अभियानों से संभव नहीं है, बल्कि ठोस आर्थिक रणनीति आवश्यक है।
आज यदि डॉलर लगभग ₹96 के आसपास है, तो इसे ₹75–₹80 तक लाने का लक्ष्य कठिन अवश्य है, लेकिन सही दिशा में बड़े कदम उठाकर रुपये को मजबूत किया जा सकता है।
भारत देश को सबसे पहले अपने निर्यात आधारित उत्पादन को युद्ध स्तर पर बढ़ाना होगा,, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, कृषि प्रसंस्करण, स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना होगा जब निर्यात बढ़ेगा, तब देश में डॉलर आएगा और रुपये की स्थिति स्वाभाविक रूप से मजबूत होगी।
भारत की सबसे बड़ी आर्थिक विसंगतियों में से एक चीन के साथ व्यापार असंतुलन है। भारत चीन को जितना निर्यात करता है, उससे कई गुना अधिक आयात करता है। यह स्थिति भारतीय उद्योग और रुपये दोनों पर दबाव डालती है। इसलिए गैर-जरूरी चीनी वस्तुओं—विशेषकर सजावटी सामान, सस्ते इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने, फर्नीचर, वॉलपेपर, मोबाइल उपकरण और दैनिक उपभोग की वस्तुओं—पर कड़े नियंत्रण की आवश्यकता है। जिन देशों से भारी आयात होता है, उनके साथ ऐसे समझौते किए जाने चाहिए कि भुगतान भारतीय रुपये में हो और वे रुपये का उपयोग भारत से ही वस्तुएं खरीदने में करें। इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी।
भारत को अपने इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को इतना सक्षम बनाना होगा कि आयात की आवश्यकता कम हो,
चिप, बैटरी, डिस्प्ले और कंपोनेंट निर्माण में भारत अग्रणी होना चाहिए।
ऊर्जा आयात भारत की सबसे बड़ी कमजोरी है। पेट्रोल और डीजल के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। इसलिए ईंधन की “राशनिंग” या नियंत्रित उपयोग की नीति पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। यदि भारत 12–15% ईंधन खपत कम कर दे, तो अरबों डॉलर की बचत संभव है। एथेनॉल मिश्रण को तेज़ी से बढ़ाना, इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देना, सार्वजनिक परिवहन मजबूत करना और अनावश्यक ईंधन खपत पर नियंत्रण जरूरी है।

सोना और चांदी का आयात भी भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालता है। भारतीय society में निवेश के रूप में सोने की परंपरा ने हर वर्ष भारी मात्रा में डॉलर बाहर भेजे हैं। यदि सरकार सोने-चांदी के आयात को सीमित करे, तो विदेशी मुद्रा बच सकती है।
विदेशी यात्राओं पर अतिरिक्त टैक्स का प्रावधान हो

भारत के पास शराब और एथेनॉल उद्योग को निर्यात क्षेत्र में बदलने की भी संभावना है। जिस प्रकार कई राज्य शराब बिक्री से भारी राजस्व कमाते हैं, उसी प्रकार यदि नियंत्रित नीति के साथ शराब और एथेनॉल निर्यात बढ़ाया जाए, तो विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती है। एथेनॉल आधारित ईंधन नीति भारत की तेल निर्भरता घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, यह भी समझना आवश्यक है कि केवल आयात रोक देने से अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं होती इसलिए संतुलित नीति जरूरी है
जहां आवश्यक आयात जारी रहें, लेकिन अनावश्यक और विलासिता आधारित आयातों को नियंत्रित किया जाए।

रुपये को मजबूत करने का वास्तविक रास्ता है—
“उत्पादन बढ़ाओ, निर्यात बढ़ाओ, ऊर्जा बचाओ, अनावश्यक आयात घटाओ और भारतीय उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा योग्य बनाओ।”
यदि भारत इस दिशा में निर्णायक कदम उठाए, तो आने वाले वर्षों में रुपया निश्चित रूप से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच सकता है।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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