रीवा जनसुनवाई में उमड़ा जनसैलाब, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की कार्यशैली पर जनता का अटूट विश्वास इतिहास में पहली बार कलेक्ट्रेट में इतनी भीड़।

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भूपेंद्र सिंह दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान
रीवा। रीवा कलेक्ट्रेट में प्रत्येक मंगलवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई अब केवल प्रशासनिक औपचारिकता न रहकर आम जनता के लिए न्याय और समाधान का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्ट्रेट परिसर में फरियादियों का ऐसा जनसैलाब उमड़ा जिसे देखकर प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रीवा के इतिहास में कलेक्ट्रेट परिसर में फरियादियों की इतनी बड़ी मौजूदगी पहले कभी नहीं देखी गई।
*भरोसे का प्रतीक बनती जनसुनवाई:*
कलेक्ट्रेट में उमड़ी यह भीड़ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा निरंतर बढ़ रहा है। जिले के दूरदराज के गांवों और कस्बों से आए लोगों का मानना है कि यदि उनकी व्यथा कलेक्टर साहब के कानों तक पहुंच गई, तो उसका निराकरण होना निश्चित है। इसी विश्वास के चलते लोग सुबह से ही अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई: जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी स्वयं एक-एक फरियादी के पास पहुंचे और उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने न केवल कागजी खानापूर्ति की, बल्कि कई गंभीर मामलों में मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को फोन कर तत्काल कार्रवाई के कड़े निर्देश भी दिए। उनकी इस त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने आम जन को काफी राहत पहुंचाई।
प्रशासन का मानवीय चेहरा: इस बार की जनसुनवाई में प्रशासन का एक मानवीय और संवेदनशील चेहरा भी देखने को मिला। चिलचिलाती धूप और लंबी दूरी तय कर आए बुजुर्गों, महिलाओं और असहाय लोगों के लिए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर चाय, और ठंडे पानी का उचित प्रबंध किया गया था। कलेक्ट्रेट के इस आत्मीय व्यवहार ने फरियादियों के मन में प्रशासन के प्रति अपनत्व का भाव पैदा किया।
जनता की आवाज: जनसुनवाई में आए ग्रामीणों का कहना है कि रीवा में पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि उनकी सुनवाई ईमानदारी से हो रही है। “कलेक्टर साहब खुद हमारी बात सुनते हैं और अधिकारियों को टोकते भी हैं। यही कारण है कि धीरे-धीरे जनसुनवाई में पहुंचने वाले लोगों की संख्या हर सप्ताह पुराने रिकॉर्ड तोड़ रही है।”
प्रशासन की इस सक्रियता ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नेतृत्व संवेदनशील और जवाबदेह हो, तो सरकारी तंत्र के प्रति जनता का विश्वास पुनर्जीवित किया जा सकता है।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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