दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान/नीरज चतुर्वेदी
मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मथुरा के चित्रकूट स्थल पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर शहर के 75 दिवंगत स्वयंसेवकों के जीवन पर आधारित संकलन पुस्तिका ‘संघ सरिता के अमर मोती’ का भव्य विमोचन हुआ। यह पुस्तक उन स्वयंसेवकों को समर्पित है जिन्होंने मथुरा में संघ की नींव रखी और अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा में लगा दिया।
कार्यक्रम के संयोजक और पुस्तक के संकलनकर्ता, भाग कार्यवाह अजय सर्राफ ने बताया कि इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को तैयार करने की शुरुआत उन्होंने कोरोना काल के दौरान की थी। इस पुस्तक में वर्ष 1940 से मथुरा में संघ कार्य के प्रारंभ होने के इतिहास और उन नींव के पत्थरों (स्वयंसेवकों) का परिचय शामिल है, जो अब ‘बैकुंठ प्रयाण’ कर चुके हैं। नाभा पीठाधीश्वर सुदामा कुटी के सुतीक्ष्ण दास जी ने पुस्तक के शीर्षक की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार मोती भगवान श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय है, उसी प्रकार समाज की सेवा करने वाले ये स्वयंसेवक भगवान की माला के मोती के समान हैं। उन्होंने जोर दिया कि स्वयंसेवकों का रोम-रोम राष्ट्र कार्य के लिए समर्पित होना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित वयोवृद्ध स्वयंसेवकों ने 1975 के आपातकाल (इमरजेंसी) के संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे संघ की योजना के तहत कई स्वयंसेवक 21 महीनों तक भूमिगत रहकर पुलिस और प्रशासन को छकाते रहे और संगठन के कार्य को गति दी। मुख्य वक्ता और संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश ने कहा कि संघ की कार्य पद्धति श्प्रसिद्धि परांगमुखश् (बिना नाम की चाहत के कार्य करना) है। हालांकि, नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए अपने नायकों की गाथाएं सुनाना आवश्यक है। वहीं, प्रांत कार्यवाह राजकुमार एडवोकेट ने कहा कि पुस्तक में शामिल हर नाम अपने आप में संघ का एक अध्याय है। कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब सभी 75 दिवंगत स्वयंसेवकों के परिवारों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। अपने परिजनों के त्याग और जीवन परिचय को सुनकर कई परिवारों की आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर विधा भारती के शिव प्रसाद, वीएचपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री अशोक, राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, विधायक पूरन प्रकाश, और महानगर संघचालक लक्ष्मीनारायण सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और संघ पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रदीप श्रीवास्तव ने किया और समापन वंदे मातरम के गान के साथ हुआ।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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