नियम बौने रसूख भारी बरघाट जनपद में डेढ़ दशक से अंगद की तरह जमे जनपद पंचायत बरघाट अधिकारी किसका है वरदहस्त

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान जिला ब्यूरो चीप सिवनी
बरघाट जनपद का ‘अघोषित तानाशाह 15 सालों से कानून को जूती पर रख बैठा यह अफ़सर किसकी शह पर मचा रहा है लूट

दैनिक केसरिया हिंदुस्तान की खबर सिवनी से प्रकाशित
बरघाट सिवनी क्या बरघाट जनपद पंचायत किसी सरकारी विभाग का हिस्सा है या किसी की निजी रियासत यह सवाल आज हर ग्रामीण की जुबान पर है। सरकारी तंत्र में तबादला एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन अधिकारी केवल सिंह परते के लिए शायद नियम-कायदे मायने नहीं रखते बीते 15 वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे परते ने यह साबित कर दिया है कि अगर ऊपर तक सेटिंग तगड़ी हो तो सरकार की तबादला एक्सप्रेस भी बरघाट की सीमा पर आकर दम तोड़ देती है जागीर बन गई है सरकारी कुर्सी आम तौर पर तीन साल में होने वाले तबादलों के बीच 15 साल का यह लंबा कार्यकाल किसी अजूबे से कम नहीं है आखिर इस कुर्सी में ऐसा कौन सा चुंबक लगा है स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि यह लॉटरी वाली कुर्सी है जहाँ विकास के नाम पर आने वाला पैसा कहाँ और कैसे खपाया जाता है यह किसी से छिपा नहीं है ठाठ नवाबी, पर सवाल सरकारी एक सरकारी मुलाजिम जिसकी तनख्वाह हजारों में है उसके ठाठ-बाट किसी रसूखदार नवाब जैसे कैसे हो सकते हैं ग्रामीणों का सीधा आरोप है कमाई कुछ और है, और दिखाई कुछ और क्या जांच एजेंसियां अपनी आंखें मूंद कर बैठी हैं या परते के वैभव की चमक ने सिस्टम की आंखों में मोतियाबिंद ला दिया है जब प्रदेश के मुखिया भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ की बात करते हैं, तो बरघाट में बैठा यह अंगद का पैर’ उनके दावों की धज्जियां उड़ा रहा है क्या परते नियम से ऊपर हैं या नियम परते की जेब में भ्रष्टाचार का अभेद्य किला या राजनीतिक संरक्षण जनता अब खुलेआम पूछ रही है कि आखिर वो कौन सा आका है जिसका वरदहस्त केवल सिंह परते पर बना हुआ है क्या मंत्री और उच्च अधिकारी इस खेल से अनजान हैं क्या बरघाट की जनता के हक का पैसा रसूखदारों की तिजोरियों में जा रहा है
15 साल का वनवास खत्म हो जाता है लेकिन परते का कार्यकाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा अब आर-पार की जंग बरघाट की जनता अब चुप रहने वाली नहीं है। यह खबर अब केवल एक सूचना नहीं बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक आक्रोश है अगर जल्द ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई और इस ‘एकछत्र राज’ का अंत नहीं हुआ तो आने वाले समय में प्रशासन को जनता के तीखे जनाक्रोश का सामना करना पड़ेगा सवाल तो अब सीधे सरकार से है क्या जांच होगी या फिर सबकुछ सेट है

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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