दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान/नीरज चतुर्वेदी
मथुरा। द्वारकाधीश मंदिर में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के अवसर पर भव्य नृसिंह लीला का आयोजन किया गया। यह लीला शाम 5ः40 बजे प्रारंभ हुई और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शाम 6ः15 बजे भगवान नृसिंह के प्राकट्य के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।
मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि यह समस्त कार्यक्रम मंदिर के गोस्वामी डॉ. वागीश कुमार जी महाराज के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। उन्होंने नृसिंह लीला को अधर्म पर धर्म और सच्ची भक्ति की विजय का प्रतीक बताया। पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त था कि उसे न दिन में मारा जा सकता है, न रात में, न किसी अस्त्र-शस्त्र से और न ही मनुष्य या पशु द्वारा। उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से रोकने के लिए अनेक यातनाएं दीं। जब हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को चुनौती देते हुए पूछा कि तेरा भगवान कहाँ है?, तब भक्त की रक्षा हेतु भगवान नरसिंह खंभा फाड़कर प्रकट हुए। भगवान ने अपनी गोद में लिटाकर, देहरी पर बैठकर, अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध किया। इस प्रकार न वरदान खंडित हुआ और न ही अत्याचारी जीवित बचा। जब हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से भगवान के अस्तित्व पर प्रश्न किया, तब भगवान नृसिंह खंभे से प्रकट हुए और संध्या समय देहरी पर बैठकर अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया। मंदिर प्रांगण में आयोजित इस लीला में नरसिंह भगवान का सजीव स्वरूप सभासद संतोष पुरुषोत्तम पाठक ने निभाया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘नृसिंह भगवान की जय’ के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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