नियमों की अर्थी पर साहब का कब्ज़ा बरघाट जनपद में केवल सिंह परते का रिमोट कंट्रोल राज क्या सिवनी प्रशासन ने टेक दिए हैं घुटने
सिवनी बरघाट लोकतंत्र में सरकारी कुर्सियां सेवा का माध्यम होती हैं, लेकिन सिवनी जिले की जनपद पंचायत बरघाट में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं यहाँ एक अधिकारी केवल सिंह परते ने जनपद पंचायत को अपनी निजी जागीर में तब्दील कर दिया है सूत्रों की मानें तो पिछले 1.5 दशकों 15 साल से परते ने अपनी कुर्सी के पाए इतने गहरे गाड़ दिए हैं कि अब वे पूरी जनपद को किसी खिलौने की तरह अपने रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं सत्ता का ऐसा मोह कि नियम भी हुए बौने हैरानी की बात यह है कि जहाँ सरकारी नियमों के मुताबिक हर तीन साल में तबादला अनिवार्य है वहीं केवल सिंह परते के मामले में सरकार और प्रशासन की फाइलें जैसे ठंडे बस्ते में सो गई हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि एक ही स्थान पर इतने लंबे समय तक जमे रहने के कारण न केवल भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हुई हैं बल्कि निष्पक्षता का गला घोंट दिया गया है यह जनपद पंचायत नहीं बल्कि परते की रियासत बन चुकी है यहाँ नियम नहीं साहब की मर्जी चलती है स्थानीय नागरिक आक्रोशित प्रमुख बिंदु आखिर क्यों सुलग रहा है बरघाट रिमोट कंट्रोल वाली सरकार आरोप है कि जनपद का हर छोटा बड़ा फैसला केवल एक व्यक्ति की उंगलियों पर नाचता है कोई भी फाइल बिना ‘विशेष आशीर्वाद के आगे नहीं बढ़ती जांच की मांग की गूंज अब यह मामला केवल सुगबुगाहट नहीं रहा बल्कि एक बड़े आंदोलन का रूप ले रहा है नागरिकों ने अब सीधे तौर पर अधिकारी के कार्यकाल फैसलों और बेहिसाब संपत्ति की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग उठा दी है सियासी गलियारों में हड़कंप सूत्रों का दावा है कि यह मुद्दा अब स्थानीय स्तर से निकलकर राजधानी के राजनीतिक मंचों तक पहुँच चुका है जल्द ही इस पर बड़े राजनेताओं की एंट्री भी तय मानी जा रही है क्या प्रशासन के पास है कोई जवाब जनता अब तीखे सवाल पूछ रही है आखिर किसके संरक्षण में 15 सालों से एक ही अधिकारी का सिक्का चल रहा है क्या बरघाट में प्रशासनिक पारदर्शिता की कोई अहमियत नहीं बची क्या प्रशासन इस साम्राज्य को ढहाने की हिम्मत दिखाएगा या फिर से चुप्पी साध ली जाएगी विस्फोटक निष्कर्ष बरघाट की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है यदि जल्द ही इस अभेद किले की जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह चिंगारी एक बड़े जन-आंदोलन की लपटें बन सकती है अब देखना यह है कि कलेक्टर सिवनी और पंचायत विभाग इस जागीरदारी प्रथा को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाते हैं
Author: Dainik kesariya Hindustan
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