सीतापुर। भारतीय सुहेलदेव समाज पार्टी प्रदेश उपाध्क्ष सुनील राजवंशी ने बताया कि जनपद सीतापुर में पंचायती राज विभाग में जिला पंचायत राज अधिकारी निरीश चन्द्र शाहू के संरक्षण में भ्रष्टाचार चरम पर चल रहा है आम जनमानस से लेकर माननीयों तक लगातार जिला पंचायत राज अधिकारी की शिकायते उच्चाधिकारियों से की जा रही है। जनपद में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार पंचायती राज से जुड़ी शिकायतें जिला पंचायत राज अधिकारी से की जाती रही है लेकिन कार्यवाही मात्र कागज पूर्ति की गई जिसका प्रमुख कारण जिला पंचायत राज अधिकारी का अधीनस्थों को संरक्षण कहा जा सकता है। जनपद में पंचायती राज विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर निदेशक पंचायती राज विभाग उत्तर प्रदेश को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया कि जनपद सीतापुर में कार्यरत जिला पंचायत राज अधिकारी नियुक्त समय से लेकर अभी तक लगातार जारी आदेशो को दर किनार कर मनमानी कार्यशैली अपना रहे है। जिससे जहाँ एक तरफ जारी आदेश मात्र कागजपूर्ती होते दिख रहे है वही दूसरी तरफ उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना हो रही है जा ेकि बहुत ही चिंता का विषय है क्योंकि जब उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन अधीनस्थ निजी लाभ के चलते नही करेंगे तो उनका पालन समय से कैसे होगा । जिसके परिणाम स्वरूप निदेशक पंचायत राज को सात सूत्रीय शिकायत देकर अवगत कराया गया था जिसमें कहा गया था कि जिला पंचायत अधिकारी द्वारा जारी आदेशो को दर किनार कर मनमानी कार्यशैली के चलते ग्राम पंचायत सचिव को उन्हीं के ग्रह ब्लॉक में नियुक्त किया गया अभी भी बहुत से सचिव गृह ब्लॉक क्षेत्र में ही कार्यरत किये गये है जबकि कुछ का तो 3 वर्ष का कार्यकाल भी पूर्ण हो चुका है । जारी आदेशो को दर किनार कर जनपद में कनिष्ठ ग्राम पंचायत सचिवों को सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) का प्रभार देने के साथ ही वित्तीय अधिकार का इस्तेमाल करने का प्रभार दिया गया है जैसे कि विकास खण्ड मछरेहटा में कार्यरत कनिष्ठ सचिव सन्दीप कुमार को नियम विरुद्ध प्रभार दिया गया । सहायक विकास अधिकारी (पंचायत )अविनाश चैधरी को जिला पंचायत कार्यालय सम्बद्ध किया जबकि यह नियम विरुद्ध है । ग्राम पंचायत सचिवों की सम्बन्धित ब्लॉक में ग्राम पंचायतों की जांच लगाई जाती हैं बाद में उनसे निजी लाभ वसूल किया जाता है। जिला पंचायत कार्यालय में ग्राम पंचायत सचिव को सम्बद्ध कर सफाई कर्मचारी का पटल वर्षों से दिया गया है जिससे जहाँ नियमो को ताख पर रखा गया वही सचिव के माध्यम से सफाई कर्मचारियों का शोषण किया जाता है और सफाई कर्मचारियों के स्थानांन्तरण सम्बद्ध से लेकर सफाई कर्मचारियों के बोनस आदि में जिला पंचायत अधिकारी द्वारा निजी लाभ हासिल किया जाता है । साथ ही निर्धारित मानक से अधिक स्थानांतरण किए गए जो कि ,स्थांनन्तरण के आंकड़े प्रमाण दे रहे है कार्यालय अभिलेखों में देखा जा सकता हैं जो नियम से अधिक हैं औचक निरीक्षण करके सहायक विकास अधिकारी (पंचायत )व ग्राम पंचायत सचिवों से जांच के नाम पर प्रताड़ित कर निजी लाभ हासिल किये जाते है। जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।साथ ही मनमानी कार्यशैली के चलते लगभग 25 से 30 प्रतिशत सफाई कर्मचारियों को निजी लाभ के चलते उन्हें आराम करने के लिए कार्यालयों में सम्बद्ध कर रखा है जिससे अधिकतर ग्राम पंचायतों में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन बुरी तरह प्रभावित हो रही है साथ ही ग्राम पंचायतों में निर्माण कराए गए आर आर सेंटर मात्र सफेद हाथी बने खड़े हुए है जिनमे कचरा नही डाला जा रहा है आदि कई ऐसे प्रकरण जनपद में है जिनके सम्बन्ध में शासन को अवगत कराया गया जारी पत्र को संज्ञान में लेते हुए उप सचिव उ.प्र. शासन के द्वारा जिला पंचायत राज अधिकारी की जांच जिलाधिकारी सीतापुर को सौपी गई है और एक सप्ताह में तथ्यात्मक जांच आंख्या मांगी गई है। अगर जिला पंचायत राज अधिकारी की निष्पक्ष जांच होती है तो जल्द ही जनपद में पंचायती राज विभाग भ्रष्टाचार मुंक्त होगा और शासन से आवंटित तमाम महत्वाकांक्षी योजनाएं आम जन मानस तक भ्रष्टाचार मुक्त व गुणवत्तायुक्त होकर पहुंचेगी।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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