रविंद्र सिंह पवैया
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ग्वालियर सूचना का अधिकार अधिनियम अक्टूबर 2005 को लागू किया गया था। यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा हथियार माना जाता रहा है। इस अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी विभाग से जानकारी प्राप्त कर सकता है। लेकिन जिला पंचायत ग्वालियर के द्वारा इस अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
गौरतलब है कि ग्वालियर के रविन्द्र सिंह ने 24 फरवरी 2026 को जिला पंचायत ग्वालियर से जानकारी मांगी गई थी की 4 वर्ष से अधिक बर्खास्त सस्पेंड सजाया आपका पंचायत सचिवों को बहाल किया गया उनके संलग्न दस्तावेज बहाली के नियम नोट सेट सहित प्रमाणित छाया प्रति
2 जिला पंचायत ग्वालियर में नरेगा के तहत ग्राम पंचायत को द्वारा शिकायतों जो शिकायते की गई उन पर जो कार्रवाई हुई शिकायती आवेदन पत्र प्रतिवेदन सहित नोट शीट सहित जानकारी चाही गई लेकिन 2 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई जिस पर रविंद्र सिंह ने 19 मार्च 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ग्वालियर को सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19 (1) के अंतर्गत अपील की गई जिस पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ग्वालियर के द्वारा अपने अधीनस्थों को ना आज तक कोई पत्राचार किया नहीं कोई आदेश सिद्ध किया इससे या व्यतीत होता है कि सचिवों की बहाली और नरेगा में चल रही शिकायतों की भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी लोक सूचना अधिकारी एस राजपूत कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सूचना के अधिकार भेजने वाले कार्यकर्ताओं को परेशान करने का काम करते हैं गुमराह करते हैं अगर इसकी ईओडब्ल्यू से जांच होती है तो राजपूत की ऐसी कई शिकायत है संज्ञान में मिलेंगे इस पर हम आपको कल विस्तार से बताएंगे







