सरई रेलवे स्टेशन पर राख की चादर: सिंगरौली में विकास या धीमा ज़हर

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रामप्रकाश उपाध्याय ब्यूरो प्रमुख सिंगरौली दैनिक केसरिया हिंदुस्तान

सिंगरौली। सिंगरौली को देश की ऊर्जा राजधानी कहा जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सरई रेलवे स्टेशन की तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि यहां प्लेटफॉर्म पर कोयले की राख इस कदर जमी हुई है कि हर गुजरने वाले यात्री के कदमों के निशान उस पर छप रहे हैं। यह सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है।प्लेटफॉर्म पर जमी राख हर कदम के साथ उड़ रही है और यात्रियों की सांसों में घुल रही है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और रोजाना यात्रा करने वाले लोग इस जहरीली हवा को मजबूरी में अपने शरीर में ले रहे हैं। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को यह दिखाई नहीं देता या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा किया जा रहा है।Deosar Assembly constituency क्षेत्र में कोयला खदानों और थर्मल पावर प्लांट्स की भरमार है। लेकिन इनसे निकलने वाली फ्लाई ऐश का सही प्रबंधन नहीं होना अब सार्वजनिक जगहों पर साफ दिखाई देने लगा है। खुले में ढुलाई, धूल नियंत्रण के नाम पर खानापूर्ति और सफाई व्यवस्था की कमी ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर खड़ा होता है। क्या आम जनता की सेहत उनकी प्राथमिकता में है? जब लोग इस जहरीले माहौल में सांस लेने को मजबूर हैं, तब जिम्मेदार लोग एसी कमरों में बैठकर योजनाओं और दावों की बात करते हैं। जमीनी हकीकत उनसे कोसों दूर नजर आती है।
इस तरह की राख के लगातार संपर्क में रहने से अस्थमा, एलर्जी, फेफड़ों की बीमारी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। सिंगरौली में यह अब एक खामोश संकट बनता जा रहा है, जिस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
जरूरत है कि रेलवे प्रशासन तुरंत इस पर कार्रवाई करे और स्टेशन की समुचित सफाई सुनिश्चित करे। साथ ही फ्लाई ऐश के प्रबंधन पर सख्त निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो। केवल कागजों में नियम बनाकर और भाषण देकर इस समस्या का समाधान नहीं होगा।
सिंगरौली की यह तस्वीर विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में यह राख सिर्फ प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाएगी। अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदार लोग जागें, नहीं तो यह लापरवाही आने वाली पीढ़ियों के लिए भारी पड़ेगी।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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