धार निप्र:–
आज राजनीति हो, सामाजिक संगठन हो, धार्मिक मंच हो या कोई भी बड़ा अभियान—अक्सर सबसे पहले किनारे पर कर दिए जाते हैं, जिन्होंने नींव रखी होती है ।जो धूप में खड़े रहे।जो बिना पद, बिना स्वार्थ और बिना संसाधनों के संघर्ष करते रहे ।जो हर संकट में संगठन के साथ चट्टान बनकर खड़े रहे।आज वही जमीनी कार्यकर्ता उपेक्षा का शिकार हैं।याद रखिए—
भीड़ से कार्यक्रम सफल हो सकता है, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं के बिना कोई भी आंदोलन, संगठन या विचारधारा लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकती।
जमीनी कार्यकर्ता मनीष पाटीदार ने कहा है कि पद और प्रचार से संगठन नहीं चलता,समर्पण, संघर्ष और कार्यकर्ताओं के विश्वास से चलता है।यदि नींव के पत्थरों को ही भुला दिया जाएगा, तो एक दिन इमारत की मजबूती भी सवालों के घेरे में आ जाएगी। उन्होंने आगे दो टुक शब्दों में कहा कि समय रहते उन देवतुल्य जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान, विश्वास और सम्मान लौटाइए, क्योंकि संगठन की सबसे बड़ी ताकत मंच पर बैठे लोग नहीं, बल्कि मैदान में लड़ने वाले कार्यकर्ता होते हैं। उन्होंने बार-बार यही क। है कि जमीनी कार्यकर्ता ही संगठन की असली पूंजी हैं।उनका सम्मान ही संगठन का सम्मान है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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