मझगवा देवघाट एम एस वेयरहाउस बना किसानों का कत्लगाह एक ही गोदाम के दो चक्कर लगवाकर अधिकारी चूस रहे अन्नदाता का खून क्या यही है आपका सिस्टम

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान जिला ब्यूरो चीप सिवनी शफीक खान मीडिया प्रभारी मो.9753992716

एक ही गोदाम के दो चक्कर दोगुना खर्च और किसानों की जेब पर डाका आखिर किसके इशारे पर चल रहा यह खेल
सिवनी/केवलारी खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसानों के सामने अब बारिश नहीं बल्कि खाद वितरण व्यवस्था सबसे बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है केवलारी विकासखंड के मझगांवां देवघाट एम एस स्थित वेयरहाउस में डीएपी और यूरिया वितरण को लेकर ऐसी व्यवस्था लागू कर दी गई है जिसने किसानों को परेशानी के दलदल में धकेल दिया है आरोप है कि किसानों को पहले ई-उपार्जन पोर्टल के माध्यम से डीएपी खाद दी जा रही है लेकिन यूरिया के लिए 24 घंटे बाद फिर से पोर्टल पर एंट्री करवाई जा रही है नतीजा यह कि किसान को एक ही देवघाट एम एस वेयरहाउस के दो-दो चक्कर लगाने पड़ रहे हैं सवाल यह उठ रहा है कि जब दोनों खाद एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं तो किसानों को अलग-अलग दिनों में क्यों बुलाया जा रहा है क्या किसानों की जेब पर डाला जा रहा अतिरिक्त बोझ ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण उन्हें बार-बार वाहन किराया मजदूरी और समय का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ रहा है एक तरफ सरकार किसानों की आय बढ़ाने के दावे कर रही है वहीं दूसरी ओर खाद वितरण की यह व्यवस्था किसानों की जेब पर सीधा आर्थिक प्रहार करती दिखाई दे रही है ई-उपार्जन पोर्टल या फिर किसी के हाथ की कठपुतली क्षेत्र में चर्चा है कि ई-उपार्जन पोर्टल का उपयोग किसानों की सुविधा के बजाय उन्हें उलझाने के लिए किया जा रहा है किसानों का कहना है कि यदि तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है तो उसे राहत देनी चाहिए लेकिन यहां तो तकनीक ही परेशानी का कारण बनती नजर आ रही है काला बाजारी की आशंका ने बढ़ाई चिंता किसानों के बीच यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि आखिर डीएपी और यूरिया को अलग-अलग समय पर देने के पीछे क्या वजह है क्या यह सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया है या फिर खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर कोई बड़ा खेल चल रहा है क्षेत्र में काला बाजारी और कृत्रिम संकट पैदा करने की आशंकाओं ने भी जोर पकड़ लिया है प्रशासन से जांच की मांग किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है उनका कहना है कि यदि खाद उपलब्ध है तो किसानों को एक ही बार में डीएपी और यूरिया दोनों उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें बार-बार भटकना न पड़े जनता पूछ रही है सवाल जब खाद एक ही वेयरहाउस में मौजूद है तो किसानों को दो बार क्यों बुलाया जा रहा है क्या यह अव्यवस्था है या फिर किसी बड़े खेल की पटकथा और सबसे बड़ा सवाल आखिर किसान कब तक सिस्टम की कठपुतली बनकर नाचता रहेगा जिस तकनीक और ई-उपार्जन पोर्टल को किसानों की सहूलियत के लिए बनाया गया था, आज मजगमा में वही तकनीक किसानों के गले का फंदा बन चुकी है किसानों का सीधा आरोप है कि अधिकारी अपनी नाकामी और मनमानी को छुपाने के लिए पोर्टल का बहाना बना रहे हैं अगर सिस्टम डिजिटल है तो एक ही क्लिक में दोनों खाद की एंट्री क्यों नहीं हो सकती बड़ा सवाल जब यूरिया और डीएपी दोनों एक ही छत के नीचे एक ही गोदाम में मौजूद हैं तो फिर किसानों को दो अलग-अलग दिनों में दो बार चक्कर लगाने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है आखिर इस दोहरे चक्कर के पीछे किसका काला हाथ है

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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