सड़क बनने से पहले ही गुणवत्ता कटघरे में, पुलिया काली रेत और घटिया गिट्टी के आरोप

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(केसरिया हिंदुस्तान संवाददाता कवर्धा)

कवर्धा: कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत लोक निर्माण विभाग द्वारा लगभग ₹3 करोड़ 47 लाख 24 हजार की लागत से निर्मित की जा रही दमगढ़-अमनिया सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही विवादों में घिरता नजर आ रहा है। लगभग 3.65 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना को ग्रामीण क्षेत्र की महत्वपूर्ण संपर्क सड़क बताया जा रहा है, लेकिन निर्माण स्थल से सामने आ रही जानकारी और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोप करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों को दरकिनार कर घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। सबसे पहले सवाल सड़क के दोनों किनारों पर बनाए जाने वाले हार्ड शोल्डर को लेकर उठ रहे हैं। निर्माण मानकों के अनुसार यहां दानेदार मुरूम का उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन आरोप है कि उसकी जगह स्थानीय मिट्टी डाली जा रही है। यदि यह आरोप सही हैं तो सड़क की मजबूती और उसकी दीर्घकालिक उपयोगिता पर सीधा असर पड़ सकता है।
बरसात के मौसम में ऐसे हार्ड शोल्डर जल्दी कटाव का शिकार होते हैं, जिससे सड़क किनारे धंसाव और क्षति की संभावना बढ़ जाती है।
वर्तमान में सड़क पर जीएसबी (ग्रेन्युलर सब बेस) स्तर का कार्य चल रहा है। यह सड़क निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण परतों में से एक मानी जाती है क्योंकि इसी पर पूरी सड़क की मजबूती निर्भर करती है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि 15 सेंटीमीटर मोटाई वाली मिक्स गिट्टी की परतों में भी गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। यदि आधारभूत संरचना में ही मानकों का पालन नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क भविष्य में भारी यातायात और मौसम की मार झेलने में असफल साबित हो सकती है।
निर्माणाधीन पुलिया कार्य को लेकर सामने आए आरोप और भी गंभीर हैं। जानकारी के अनुसार पुलिया निर्माण में स्थानीय नदी से प्राप्त काली मिट्टी युक्त रेत का उपयोग किया गया है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार पुलिया और सीमेंट-कंक्रीट संरचनाओं में उपयोग की जाने वाली रेत साफ और मानक गुणवत्ता की होनी चाहिए। मिट्टी मिश्रित रेत सीमेंट के साथ उचित बंधन नहीं बना पाती, जिससे संरचना की मजबूती प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसके अलावा पुलिया निर्माण में क्रेशर से निकलने वाली निम्न गुणवत्ता की गिट्टी उपयोग किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का मामला नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब करोड़ों रुपये की परियोजना लोक निर्माण विभाग की निगरानी में संचालित हो रही है तो निर्माण गुणवत्ता पर इतने गंभीर आरोप आखिर क्यों लग रहे हैं? विभागीय व्यवस्था के अनुसार उप अभियंता, सहायक अभियंता तथा कार्यपालन अभियंता स्तर पर नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी तय होती है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है तो जिम्मेदारी केवल ठेकेदार तक सीमित नहीं रह जाती। निर्माण की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही भी स्वतः सवालों के घेरे में आ जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान ही स्वतंत्र जांच नहीं कराई गई तो बाद में किसी भी अनियमितता को साबित करना कठिन हो जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क में उपयोग की जा रही जीएसबी सामग्री, मिक्स गिट्टी, हार्ड शोल्डर में डाली गई सामग्री तथा पुलिया निर्माण में प्रयुक्त रेत और गिट्टी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराई जाए। साथ ही किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से थर्ड पार्टी निरीक्षण भी कराया जाए ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।
जनता के बीच यह चर्चा भी तेज है कि यदि निर्माण पूरा होने के कुछ वर्षों के भीतर सड़क उखड़ने लगे, किनारे धंस जाएं या पुलिया क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। क्या तब भी दोष एक-दूसरे पर मढ़कर मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा, या फिर अभी से गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दमगढ़-अमनिया सड़क परियोजना अब केवल एक निर्माण कार्य नहीं रह गई है, बल्कि यह सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बनती जा रही है। जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चाहिए कि वे मामले का तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएं। यदि आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदार के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
करोड़ों रुपये की यह सड़क जनता की सुविधा और क्षेत्र के विकास के लिए बनाई जा रही है। ऐसे में जनता यह जानना चाहती है कि सड़क मजबूत बनेगी या फिर निर्माण पूरा होने से पहले ही गुणवत्ता पर उठे सवाल भविष्य के किसी बड़े नुकसान की चेतावनी साबित होंगे।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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