केसरिया हिंदुस्तान जिला ब्यूरो महेश शिवहरे
छिंदवाड़ा/जुन्नारदेव :- मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत एक ऐसा भूतिया फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है एक तरफ गाड़ी थाने में जब्त खड़ी है और वही दूसरी तरफ उसी गाड़ी के नंबर पर सरकारी अनाज के बिल फाड़े जा रहे हैं! आखिर थाने में खड़ी गाड़ी सरकारी पोर्टल पर कैसे दौड़ रही थी? कौन है इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड? जिला प्रबंधक के एफआईआर (FIR) के आदेश के बाद भी पुलिस के हाथ क्यों बंधे हैं? और क्यों एक मजबूर महिला को न्याय के लिए कलेक्टर की चौखट पर गुहार लगानी पड़ रही है ?”
आज इस फर्जीवाड़े की परत-दर-परत खोलेंगे और दिखाएंगे कि कैसे जनता के हक के निवाले पर विभाग की मिलीभगत से डाका डाला गया मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत एक ऐसा सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने विभागीय पारदर्शिता और पोर्टल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं मामला कुंडीपुरा थाने से जुड़ा है जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के सेक्टर 15 का वाहन 10 से 12 मार्च के बीच दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण कुंडीपुरा पुलिस की अभिरक्षा (कस्टडी) में खड़ा था नियमत जब वाहन पुलिस के पास था तो उससे परिवहन असंभव था लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाड़ियों ने मुमकिन को भी नामुमकिन कर दिखाया आरोप है कि सेक्टर संचालक श्याम पाल ने कंप्यूटर ऑपरेटर प्रकाश और वेयर हाउस घुटटी के केंद्र प्रभारी के साथ मिलीभगत कर जाली दस्तावेज तैयार किए। इन कागजों में दिखाया गया कि उक्त वाहन से शासकीय अनाज का परिवहन किया गया है और मजे की बात यह है कि यह फर्जी आंकड़े खाद्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन भी दर्ज हो गए और बिल भी जनरेट कर लिए गए!
अफसरों के आदेश को ठेंगे पर रखा रसूख के आगे पुलिस-प्रशासन मौन:- इस पूरे खेल की पोल जुन्नारदेव निवासी श्रीमती निर्मला पाल ने खोली शिकायत के बाद हड़कंप मचा और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉरपोरेशन लिमिटेड के जिला प्रबंधक ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि आरोपी श्याम पाल के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज कराई जाए लेकिन हैरानी की बात है कि जिला प्रबंधक के लिखित आदेश के कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय अधिकारियों और पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा आखिर किसका संरक्षण इन आरोपियों को मिल रहा है ?
जनसुनवाई में गुहार:- साहब कागजों पर चल रहा है भ्रष्टाचार का पहिया जब विभाग और पुलिस ने आंखें मूंद लीं तो पीड़िता निर्मला पाल मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचीं उन्होंने कलेक्टर के समक्ष सबूतों का पुलिंदा रखते हुए गुहार लगाई कि इस सिंडिकेट ने न केवल सरकारी पैसे की चोरी की है बल्कि पुलिस रिकॉर्ड और सरकारी पोर्टल के साथ भी धोखाधड़ी की है कलेक्टर से मांग की गई है कि इस फर्जीवाड़े के मुख्य किरदारों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए!
अब सवाल प्रशासन से:-पुलिस अभिरक्षा में खड़े वाहन का ऑनलाइन ‘ट्रिप’ कैसे लग गया ?जिला प्रबंधक के FIR के आदेश को अब तक दबाकर क्यों रखा गया ? क्या मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को अधिकारी और ऑपरेटर मिलकर पलीता लगा रहे हैं अब देखना होगा कि जनसुनवाई के बाद छिन्दवाड़ा प्रशासन इस डिजिटल डकैती पर क्या एक्शन लेता है या फिर जांच की फाइलें भी उस अदृश्य वाहन की तरह गायब कर दी जाएंगी! सम्भार वरिष्ठ पत्रकार आर के प्रजापति
Author: Dainik kesariya Hindustan
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