धनेली के बीही बारी में मनरेगा घोटाले की बू! 14 मई 2025 से स्वीकृत पुलिया निर्माण 15 दिन से ठप, बंद साइट पर भी भर रहा मस्टरोल

SHARE:

(केसरिया हिंदुस्तान जिला ब्यूरो चीफ तोरन कुमार)

कवर्धा/पंडरिया। ग्राम पंचायत गांगी बहरा अंतर्गत धनेली के बीही बारी के पास स्वीकृत पुलिया निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं की आशंका ने ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है। सूचना पटल के अनुसार कार्य प्रारंभ तिथि 14 मई 2025 अंकित है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले 15 दिनों से निर्माण स्थल पर पूरी तरह काम बंद पड़ा है। न मजदूर मौजूद हैं, न निर्माण सामग्री की हलचल। इसके बावजूद मस्टरोल जारी होने और हाजरी दर्ज किए जाने की जानकारी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है।
यह प्रकरण सीधे तौर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रावधानों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। अधिनियम की धारा 3 के अनुसार मजदूरी केवल वास्तविक कार्य के बदले ही दी जा सकती है, जबकि धारा 19 में पारदर्शिता और सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है।
बंद पड़ी साइट, कागजों में चल रहा काम!
धनेली के बीही बारी के पास स्थित निर्माण स्थल पर वर्तमान में किसी प्रकार की गतिविधि नजर नहीं आ रही। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले 15 दिनों से काम पूरी तरह बंद है। इसके बावजूद मस्टरोल जारी रहना यह संकेत देता है कि कागजों में हाजरी भरकर सरकारी राशि निकालने की तैयारी है।
मनरेगा दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कार्य दिवस की उपस्थिति वास्तविक आधार पर दर्ज की जानी चाहिए। जॉब कार्ड प्रविष्टि, तकनीकी सत्यापन और कार्यक्रम अधिकारी की निगरानी के बाद ही भुगतान संभव है। यदि स्थल पर काम नहीं हो रहा, तो हाजरी किस आधार पर भरी जा रही है — यह बड़ा सवाल है।
कुछ महीनों में ही ठप पड़ा निर्माण
14 मई 2025 को शुरू इस पुलिया निर्माण का उद्देश्य ग्रामीणों को बरसात में सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना था। लेकिन कुछ महीनों में ही काम ठप पड़ जाना योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अधूरा निर्माण ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
मनरेगा का उद्देश्य टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण और ग्रामीणों को रोजगार देना है। यहां दोनों ही उद्देश्य अधूरे नजर आ रहे हैं।
कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका संदिग्ध
मनरेगा के तहत कार्यक्रम अधिकारी पर कार्यों की निगरानी और मस्टरोल की सत्यता सुनिश्चित करने की सीधी जिम्मेदारी होती है। यदि 15 दिन से कार्य बंद है और फिर भी मस्टरोल जारी है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता या संभावित मिलीभगत की ओर संकेत करता है।
बिना कार्य के मजदूरी निकालना सरकारी धन का दुरुपयोग है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यासभंग) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
सामाजिक अंकेक्षण पर भी प्रश्न
मनरेगा में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य है। ग्राम सभा में कार्य की प्रगति प्रस्तुत करना और सूचना पट्ट पर पूर्ण विवरण इस अंकित करना पारदर्शिता का हिस्सा है। यदि जमीनी हकीकत और कागजी रिकॉर्ड में अंतर है, तो सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों ने 14 मई 2025 से अब तक जारी सभी मस्टरोल और भुगतान विवरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। दोषी पाए जाने पर संबंधित कार्यक्रम अधिकारी और जिम्मेदार अमले पर कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है — क्या मनरेगा में पारदर्शिता बहाल होगी या फिर बंद साइट पर चल रहे ‘कागजी निर्माण’ का खेल यूं ही जारी रहेगा

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949

Leave a Comment

best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई