हरीश कुमार पांडे/जिला ब्यूरो
पीलीभीत । जनपद में बुधवार का दिन किसानों के आक्रोश का गवाह बना, जब पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट परिसर में इकट्ठा हुए। हाथों में मांगों के बैनर और नारों की गूंज के बीच किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और साफ संकेत दिया कि अब मुद्दों पर टालमटोल बर्दाश्त नहीं होगा। इस आंदोलन की चिंगारी ग्राम अण्डरायन के किसान ललित वर्मा पर दर्ज मुकदमे से भड़की। किसानों का आरोप है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज यह मुकदमा राजनीतिक दबाव का नतीजा है। हेमराज वर्मा ने इसे “फर्जी कार्रवाई” बताते हुए कहा कि खेती के लिए रखा गया डीजल ही किसान के खिलाफ सबूत बना दिया गया, जो न्याय के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मामले को खत्म कर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन सिर्फ एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहा। किसानों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों के जरिए सरकार पर दबाव बनाया। ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए खाद की किल्लत, गन्ना किसानों का करीब ₹253 करोड़ बकाया भुगतान, और मौसम से प्रभावित गेहूं फसल का मुआवजा—ये मुद्दे सबसे प्रमुख रहे। किसानों ने कहा कि भुगतान में देरी उनकी आर्थिक रीढ़ तोड़ रही है। क्रय केंद्रों की अव्यवस्थाएं और बिचौलियों की भूमिका भी किसानों के निशाने पर रही। इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की 5 लाख रुपये तक की घोषित छूट को तुरंत लागू करने की मांग उठाई गई। बिजली व्यवस्था को लेकर भी गुस्सा साफ दिखाई दिया। किसानों ने बढ़ते बिल और कटौती के लिए स्मार्ट मीटर को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे हटाने की मांग की। प्रदर्शन के बाद किसानों ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। अंत में हेमराज वर्मा ने दो टूक कहा—अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और बड़ा होगा। कलेक्ट्रेट से उठी यह आवाज अब साफ इशारा कर रही है कि पीलीभीत का किसान अपने हक की लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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