महिदपुर में लाल मंदिर उपाश्रय में जैन शासन स्थापना दिवस मनाया गया

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केसरिया हिंदुस्तान दिनेश वर्मा

महिदपुर। श्री मुनि सुव्रतस्वामी जैन श्वेतांबर संघ लाल मंदिर उपाश्रय में जैन शासन स्थापना दिवस
सागर समुदायवर्ती पपू गुरूवर्या श्री अमीपूर्णा श्री मसा, पपू अमीदर्शा श्री मसा आदि ठाणा 7 की पावन निश्रा में आयोजित हुआ।
शासन स्थापना दिवस पर जिन शासन ध्वजारोहण कार्यक्रम ध्वज वंदन सहयोगी श्री नवरत्न परिवार द्वारा ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण के समय समग्र जैन श्रीसंघ के साथ बाबूलाल आंचलिया, सरदारमल चौपड़ा, डॉ अशोक चौपड़ा,अरुण बुरड़,पारस लुणावत,संजीव सोनी बबलू ,रमेश गादिया, हंसमुख नवलखा,अतुल आंचलिया, आकाश कोचर आदि उपस्थित रहे।ध्वजारोहण के पहले ध्वज का विधिविधान से पूजन किया गया।
ध्वजारोहण पश्चात स्वल्पाहार का आयोजन हुआ। लाभार्थी डॉ अशोक चौपड़ा परिवार रहे।
पूज्य गुरुवर्या ने उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा-भारत देश के लिए स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस 26 जनवरी,यह दो दिन महत्वपूर्ण है तो जैन शासन के अनुयायियों के लिए वैशाख सुद 11 का दिन महत्वपूर्ण है।साढे बारह वर्ष की घोर साधना का विस्फोट हुआ।वैशाख सुदी 10 के दिन परमात्मा श्री महावीर स्वामी भगवंत को केवल ज्ञान और केवल दर्शन की प्राप्ति हुई। तीन लोक के समस्त चराचर पदार्थ को देखने वाले बने और वैसाख सुदी 11 के दिन शासन की स्थापना की।पूरे विश्व को जिन शासन मिला।महसेन वन में प्रभु पधारे।गुरू गौतम सह 4400 को प्रभु ने दीक्षा प्रदान की एवं समस्त गणधरों की शंकाओं का समाधान किया और चतुर्विध संघ की स्थापना की।शासन मिला तो हमें जीवन जीने की पद्धति मिली,संस्कार मिले,संस्कृति मिली वरना हम जंगल के भील की तरह होते।कोई कहता है जिन शासन 2600 साल पुराना है।जैन शासन तो आदिनाथ प्रभु से चला है।इस अवसर्पिणी में धर्म का तो ध सिखाने वाले हैं दादा आदिनाथ जो प्रथम तीर्थंकर हैं और जिन्होंने जीने की कला सिखाई जिसके अंतर्गत असि(तलवार,शस्त्र), मसि(लेखन,स्याही),कृषि(खेती)सिखाई और वीर परमात्मा प्रभु महावीर स्वामी जी चरम तीर्थंकर हैं।शासन स्थापना का मुख्य हेतु-जो मोक्ष मार्ग बंध हुआ था उसे खोलने का था।मोक्ष मार्ग की आराधना से लोगों को जोड़ने का था।आराधना क्यों? कैसी करनी? साधु का आचार क्या? श्रावकों का आचार क्या? यह बतलाया।अब तक सब जन थे और पश्चात ऊपर की दो मात्रा लगाकर जैन बनने के लिए रात्रि भोजन त्याग और जमींकंद का त्याग करेंगे तो जैन बनेंगे।शासन याने आत्मोन्नति के नियमों का बंधारण।शासन ध्वज लहरा के,शासन वंदना करके,आज का दिन बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया। अंत में आभार नवरत्न परिवार एवं चौपड़ा परिवार ने व्यक्त किया।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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