जिला ब्यूरो अब्दुल हमीद की खास रिपोर्ट
मानवता ईश्वर के लिए कल्याण संस्था परिषद के अध्यक्ष अब्दुल हमीद ने मीडिया के माध्यम से कहा है कि आज जिस चीज़ को पूरी दुनिया “कामयाबी” समझकर उसके पीछे भाग रही है, वह दरअसल एक भ्रम, एक छलावा है।
उन्होंने कहा कि धन, पद और बाहरी प्रतिष्ठा को सफलता का मापदंड मान लेने वाला समाज धीरे-धीरे अपने वास्तविक उद्देश्य से भटकता जा रहा है। यह एक ऐसी दौड़ है, जिसमें इंसान जीतकर भी हार जाता है, क्योंकि वह अपने अंदर की सच्चाई, अपनी आत्मा की पवित्रता और मानवता के मूल्यों को खो बैठता है।
अब्दुल हमीद के अनुसार, वास्तविक सफलता वह नहीं जो दुनिया की नज़रों में दिखाई दे, बल्कि वह है जो इंसान के चरित्र, उसके विचारों और उसके कर्मों में झलकती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि इंसान ने अपने भीतर की सच्चाई को खो दिया, तो उसकी हर बाहरी उपलब्धि केवल एक दिखावा बनकर रह जाती है।
इसी संदर्भ में उन्होंने मृत्यु के सत्य की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन एक सीमित यात्रा है, जिसका अंत निश्चित है। मृत्यु केवल एक घटना नहीं, बल्कि वह आईना है, जिसमें इंसान को अपनी पूरी जिंदगी का प्रतिबिंब दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य मृत्यु के बारे में गंभीरता से विचार करता है, तब उसके भीतर आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू होती है। वह अपने हर कर्म का मूल्यांकन करता है—कहां उसने सच्चाई का साथ दिया और कहां उससे दूर हुआ। यही आत्ममंथन उसे अपने वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है।
अब्दुल हमीद ने स्पष्ट रूप से कहा कि मृत्यु की असली तैयारी पवित्रता धारण करना है।
उन्होंने बताया कि पवित्रता केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और इरादों की शुद्धता है। जब तक इंसान के भीतर ईर्ष्या, द्वेष, छल और स्वार्थ मौजूद हैं, तब तक वह सच्चे अर्थों में सफल नहीं हो सकता।
उन्होंने आगे कहा कि पवित्रता का मार्ग अपनाने वाला व्यक्ति अपने भीतर ऐसी शांति और संतुलन प्राप्त करता है, जिससे वह मृत्यु से भयभीत नहीं होता। उसके लिए मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक परिवर्तन बन जाती है, क्योंकि उसने अपने जीवन को सच्चाई और मानवता के मार्ग पर जीया होता है।
समाज को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने जीवन की प्राथमिकताओं को पुनः निर्धारित करें। हमें यह समझना होगा कि सच्ची सफलता वही है, जो हमारे जाने के बाद भी हमारे कर्मों के रूप में जीवित रहे।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने विचारों को पवित्र बना ले, अपने व्यवहार में सच्चाई ला ले और अपने कर्मों को मानवता के हित में समर्पित कर दे, तो वही उसकी वास्तविक तैयारी है—मृत्यु के लिए भी और जीवन के लिए भी।
“जो इंसान अपने भीतर पवित्रता को स्थान दे देता है,
वह दुनिया की नजरों में चाहे कुछ भी हो,लेकिन सच्चाई में वही सबसे सफल होता है।”
Author: Dainik kesariya Hindustan
सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949







