साड़ी खादर के माफिया ने किसानों का किया जीना हराम

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बांदा। जनपद के साड़ी खंड एक के खंड संचालक ने स्थानीय लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है, बेचारे किसान प्रतिदिन अपने बच्चों के हक को सुरक्षित करने के लिए खनन माफिया के सामान मिन्नते करते है कि उनकी जमीनों में खनन करना बंद कर दे इतना ही नहीं खदान तक जाने वाले रास्तों के बीच पड़ने वाली जमीनों जिसमें खदान संचालक ने नदी की बजरू को डाल कर बंजर बना दिया है जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों ओवरलोड गाड़िया फर्राटा भर रही है जबकि किसानों ने शर्त रखी थी कि हम ट्रकों के आवाजाही के लिए रास्ता तो दे रहे है लेकिन उस रास्ते में मिट्टी के अलावा कुछ नहीं डाला जाएगा लेकिन संचालक ने नदी का बजरा और कांटे डाल खेत को बंजर बना दिए है इससे किसान आक्रोशित हो गए है उनका कहना है कि इससे खेत बंजर हो जाएंगे तो फसल नहीं उगेगी इससे हम अपने बच्चों का परिवार कैसे पालेंगे यही कारण है कि किसान आए दिन स्थानीय प्रशासन से लेकर मंडलायुक्त तक ज्ञापन भी दे चुके है लेकिन खनन माफिया के बाहुबल के आगे प्रशासन की हिम्मत नहीं पड़ रही की वो खदान का निरीक्षण कर आम जनता की आवाज को सुन सके इसीलिए खदान संचालक अब पूर्णतः गुंडई में उतारू हो चुका है उसका कहना है कि हमारी पकड़ भाजपा में केंद्र तक है क्योंकि हम भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और हमारा परिवार भाजपा के बड़े बड़े पदों के काबिज होने के साथ हमारा दबदबा समूचे पूर्वांचल में है शायद यही वजह है कि जनपद के प्रशासन की हिम्मत ही नहीं है कि साड़ी खदान की तरफ आंख उठा कर देख सके अगर उसने ऐसी गलती कर भी दी तो हम प्रशाशन का वही हाल करेंगे जो किसानों का कर रहे है न वह घर के रहेंगे और न ही घाट के वह नौकरी करके अपने बच्चों का सिर्फ परिवार पाले अगर सैलरी से गुजारा न पड़ रहा हो तो हमें बताए हम पूरा कर देंगे लेकिन हमारे काम में दखल न दे क्योंकि हमारा तो काम करने का तरीका ही यही है और हम अपने तरीके से काम कर रहे है जो हम करते है वहीं देश का कानून बन जाता है। किसानों ने आरोप लगाते हुए बताया कि यहां प्रतिदिन सैकड़ों गाड़िया बिना किसी वैद्य परिपत्र के निकलती है एक दिन हम लोगों ने खनिज अधिकारी को मौके में बुलाया भी था लेकिन उनकी भी हिम्मत नहीं पड़ी और उनके सामने से लगातार ओवरलोड गाड़िया बिना किसी वैद्य परिपत्र के कांटे के ऊपर से निकल रही थी और खनिज अधिकारी अपना लिफाफा लेकर वापस पवेलियन चले आए उस दिन से संचालक के भाव सातवें आसमान पर आ गए है। किसान छोटा सिंह ने बताया की अब हमारी आस सिर्फ जनपद के नए जिलाधिकारी से है कि वह किसानों के साथ न्याय करेंगे या फिर वह भी गुलदस्ते और मिठाई का डिब्बा लेकर खुश हो जाएंगे अगर ऐसा ही रहा तो किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम अपने हक के लिए सूबे के मुखिया के पास जनता दरबार में जाएंगे और न्याय की मांग करेंगे।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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