लैब टेक्नोलॉजिस्ट के अधिकारों को लेकर MLTWA की आवाज बुलंद, संगठन ने उठाए अहम मुद्दे

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मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी वेलफेयर एसोसिएशन मध्यप्रदेश (MLTWA) एवं बीपीएलटी (BPLT) द्वारा 15 अप्रैल को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट डे मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लैब टेक्नोलॉजिस्ट के अधिकारों और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। कार्यक्रम में लैब टेक्नीशियन राहुल पौराणिक (नरेन्द्र) की भूमिका विशेष रूप से उज्‍जैन जिला अध्‍यक्ष के रूप में प्रमुख रही, जिन्होंने टेक्नोलॉजिस्ट से जुड़े कई अहम मुद्दों को मजबूती से सामने रखा।
प्रदेश महासचिव कमलेश राठौर ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार के हालिया नोटिफिकेशन में लैब टेक्नोलॉजिस्ट के अधिकारों की अनदेखी की गई है, जो इस पेशे से जुड़े लोगों के लिए निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि लैब टेक्नोलॉजिस्ट स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें नीतिगत स्तर पर अपेक्षित सम्मान और अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विरोध दर्ज कराया गया है। देशभर से हजारों ईमेल भेजकर सरकार से इस नोटिफिकेशन पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। यह अभियान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार यादव एवं प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में चलाया गया।
राहुल पौराणिक ने संगठन के मध्यम से कॉर्पोरेट लैब्स की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कॉर्पोरेट लैब्स अत्यधिक कम दरों पर जांच सेवाएं दे रही हैं, जिससे न केवल अनैतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, बल्कि जांच की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति छोटे लैब संचालकों और प्रशिक्षित टेक्नोलॉजिस्ट के लिए चुनौती बनती जा रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी कलेक्शन सेंटर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए, ताकि बिना पंजीकरण के चल रही लैब गतिविधियों पर नियंत्रण हो सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि केवल प्रशिक्षित और योग्य लैब टेक्नोलॉजिस्ट से ही जांच कार्य कराया जाना चाहिए, ताकि मरीजों की सुरक्षा और जांच की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
इसके अलावा संगठन ने मध्यप्रदेश अलाइड हेल्थ केयर काउंसिल में लैब टेक्नोलॉजिस्ट को प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि जब तक टेक्नोलॉजिस्ट को नीति निर्माण में भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा जल्द उचित कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल टेक्नोलॉजिस्ट के अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी है।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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