कांकेर। सेवानिवृत्त प्रधान अध्यापक, वेतन केन्द्र प्रभारी एवं ग्लोरी शिक्षा एवं सामाजिक समिति, पैराडाइज हायर सेकेण्डरी स्कूल कांकेर के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रामसेवक रजक के जीवन पर आधारित एक भावनात्मक लेख उनके पुत्र धीरज कुमार रजक (व्याख्याता, गणित, कन्या हाई स्कूल मांझापारा, प्रेक्टिसिंग स्कूल कांकेर) द्वारा लिखा गया है।
लेख में स्वर्गीय रामसेवक रजक के सरल, ईमानदार एवं समर्पित व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में पूरी निष्ठा से कार्य करने वाला बताया गया है। लेखक ने अपने पिता के प्रति शिक्षक और अभिभावक—दोनों रूपों में गहरा सम्मान व्यक्त किया है।
लेख में बाल्यकाल की कई स्मृतियों का जिक्र किया गया है। एक प्रसंग में बताया गया है कि बचपन में लेखक अनजाने में घर से निकलकर बी.डी.ओ. ऑफिस पहुंच गए थे, जहां से पिता ने स्नेहपूर्वक समझाकर उन्हें सुरक्षित घर लाया। वहीं, साप्ताहिक बाजार जाने और बालूशाही खिलाने जैसे छोटे-छोटे पल आज भी उनकी स्मृतियों में जीवंत हैं।
स्वर्गीय रामसेवक रजक द्वारा 1980 के दशक में कांकेर ब्लॉक के ट्रायबल विभाग के शिक्षकों को समय पर वेतन वितरण करने की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया गया है। वे हर माह की पहली तारीख को वेतन वितरण सुनिश्चित करते थे। इस दौरान लेखक को मिलने वाले पांच रुपये और उससे परिवार के साथ सिनेमा देखने की यादें लेख में भावुकता के साथ प्रस्तुत की गई हैं।
लेख के अनुसार, स्वर्गीय रामसेवक रजक का जीवन सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा है, जो आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
यह लेख का प्रथम भाग है, जिसे धीरज कुमार रजक ने अपने पिता की स्मृति को समर्पित किया है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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