भारती धाकड़ सीईओ जनपद पंचायत बरई घाटीगांव मुख्य कार्यपालन अधिकारी को गुमराह करने में अहम जिम्मेदारी निभा रही फिर भी जिम्मेदार आखिर चुप क्यों?

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जनपद पंचायत सीईओ की मेहरबानी सचिव सतेंद्र सिंह ने
गरीबों के प्रधानमंत्री आवास पर डाला डाका पैसे लेकर पत्र को किया पत्र जिम्मेदार फिर भी मोन

दैनिक केसरीया हिंदुस्तान
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ग्वालियर। जनपद पंचायत घाटीगांव की ग्राम पंचायत पटाई में सरकारी प्रधान मंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि पंचायत में पात्र गरीब हितग्राहियों को अब तक आवास योजना का लाभ नहीं मिला, जबकि आर्थिक रूप से सक्षम और अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया गया है।
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक, कुछ ऐसे लोगों को आवास योजना का लाभ दिए जाने की बात सामने आ रही है, जिनके पास पहले से पक्के मकान और वाहन मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर वास्तविक जरूरतमंद गरीब परिवार आज भी अपने आशियाने के इंतजार में हैं। आरोप यह भी हैं कि पैसे देने में असमर्थ गरीब हितग्राहियों को योजना के लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
इस पूरे मामले में पंचायत स्तर पर सचिव और पीसीओ काशी प्रसाद तथा सतेंद्र सिंह की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कथित तौर पर पैसे लेकर अपात्र व्यक्तियों के पक्ष में कार्रवाई की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
वहीं जनपद पंचायत घाटीगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी भारती धाकड़ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी नियमित रूप से क्षेत्र Iका निरीक्षण नहीं करतीं और कार्यालय से ही कार्यों का संचालन करती हैं। ऐसे में ग्राम पंचायतों में योजनाओं की वास्तविक स्थिति और गरीब हितग्राहियों की समस्याओं की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीबों के लिए चलाई जा रही सरकारी आवास योजना का लाभ आखिर पात्र हितग्राहियों तक क्यों नहीं पहुंच रहा? क्या अपात्रों को लाभ देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
प्रशासन से मांग है कि ग्राम पंचायत पटाई में आवास योजना के सभी स्वीकृत हितग्राहियों की सूची, पात्रता, भौतिक सत्यापन, भुगतान रिकॉर्ड और आवास निर्माण की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
गरीबों के सिर पर छत का सपना आखिर कब पूरा होगा, या सरकारी योजनाओं का लाभ इसी तरह प्रभावशाली लोगों तक ही सीमित रहेगा?

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