मध्य प्रदेश में आदिवासी महिला सरपंच की हालात खराब कई ऐसी महिला अदिबासी सरपंच हैं, जो सरपंच तो बन गई, लेकिन सरपंची उनके, गांव के दबंग और पंचायत के सचिव ही संभालते हैं

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आदिवासी हितैसी सरकार क्या दोषियों पर कार्यवाही कब

एक वर्ष पहले शिकायतकर्ता के आवेदन को मुख्य कार्यपालिका जिला पंचायत ग्वालियर ने मार्क किया जनपद सीईओ घाटीगांव को लेकिन जांच प्रतिवेदन गायब जिम्मेदारों पर कारवाई कब

रविंद्र सिंह पवैया केसरिया हिंदुस्तान 964481407

मध्य प्रदेश ग्वालियर घाटीगांव में कई ऐसी महिला अदिबासी सरपंच हैं, जो सरपंच तो बन गई, लेकिन सरपंची उनके, गांव के दबंग और पंचायत के सचिव ही संभालते हैं. बराई घाटीगांव की जनपद जनपद की ग्राम पंचायत पटाई की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. सरपँच है, लेकिन सिर्फ नाम के लिए. सरपँच तो उनके पंचायत के दबंग ही चलाते हैं. इतना ही नहीं ग्राम पंचायत पाटई ग्राम पंचायत से महिला आदिवासी सरपंच तो है, लेकिन नाम मात्र की. इस पंचायत पर सचिव ने कब्जा जमा रखा है बरई में लगातार भ्रष्टाचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं मामले इसलिए बढ़ रहे हैं सत्ता और प्रशासन की मिली भगत से लगातार लाखों करोड़ों रुपए के गफले बाजी चल रही है मध्य प्रदेश सरकार की मंशा है कि आदिवासी क्षेत्र में महिला आदिवासी अगर प्रतिनिधित्व करती है तो उसे एक अलग भूमिका में माना गया है इधर यह मामला उल्टा होता जा रहा है उल्टा शब्द हम इसलिए कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश सरकार की मनसा को पलीता लगाते हुए नजर आ रही है जनपद सीईओ बरई घाटीगांव सूत्र बताते हैं कि 2 से 4 परसेंट तक कमीशन के बाद सचिव की फाइल साइन होती है पर अगर इस तरीके का भ्रष्टाचार बढ़ता जाएगा तो गुणवत्ता बिहीन होना लाजमी है हम आपको बता दें कि

*जनपद सीईओ ने पूर्व में भी अपनी जनपद पंचायत कार्यालय में हरे भरे – पेड़ों को अपने कार्यालय में बैठकर कटवा दिया गया*जिस पर आए दिन तक जिम्मेदार व्यक्ति तय नहीं हुआ ग्वालियर की गजब ग्राम पंचायत पाटई जिसमें 2024 25 में शिकायत होती है और शिकायत में जांच गठित होती है लेकिन आज दिन तक वह जांच गठित होकर जांच दल अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करता है आखिर जनपद पंचायत की मुखिया इतनी उदासीनता में क्यों है क्या सिर्फ परसेंटेज के खेल पर ही जिंदा है या फिर भ्रष्ट अफसर साहब पर भी कार्रवाई करेंगे केसरिया हिंदुस्तान की टीम ने जब उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करना चाहा तो मैडम ने मोबाइल उठना लाजमी नहीं समझा ग्राम पंचायत पाटई में गजब मामला जब आया तब केसरिया हिंदुस्तान की टीम जनपद अध्यक्ष पति बरई घाटीगांव से सवाल पूछा क्या यह पंचायत आप चला रहे हैं तो उन्होंने कहा यह सब राजनीतिक बातें हैं मैं पूर्व सरपंच हूं पंचायत नहीं चला रहा केसरिया हिंदुस्तान  का सीधा सवाल है आप  *जनपद अध्यक्ष  घाटी गांव नहीं  है उसके बावजूद भी प्रमाण पत्र कैसे बांट सकते हैं जनपद अध्यक्ष पति दिलीप रावत जिला पंचायत के मुखिया मुख्य कार्यपालन अधिकारी के बगल से आप खड़े होकर किस  हेसियत से प्रमाण पत्र वितरण कर रहे थे इससे व्यथित होता है कि सत्ता और प्रशासन में अच्छी पकड़ रख प्रशासन को लगवा रहे लाखों का चुना जिम्मेदार की चुप्पी राजनेता चल रहा है जनपद पंचायत बरई घाटीगांव  पाटई  इस पंचायत में जो चेक डैम बड़ी-बड़ी धनराशि के बनाए गए आखिर वह चेक डेम   कहां है अगर चेक डेम नहीं है तो जांच अधिकारियों ने अभी तक जांच क्यों नहीं की हम आपको बताना चाहते हैं भ्रष्टाचार के तहत तक हम आपको लेकर जाएंगे किसने कितना हिस्सा लिया उसकी बात भी आप तक लेकर सामने आएंगे
*प्रशासन जाग जाए अन्यथा EOW कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बरई घाटीगांव में जो मुखिया है वह भी तारीख करने जाएंगी*
 हम आपको बता दें कि सत्ता और राजनेता मिलकर लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ाते जा रहे हैं जांच ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है और जिम्मेदार मौज उड़ा रहे हैं इस पंचायत की भ्रष्टाचार की पोल हम अगले बुधवार को फिर खोलेंगे जिसमें कोशिश होगी भ्रष्ट अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाए जिला पंचायत ग्वालियर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संज्ञान में नहीं रहते कई मामले बाबू कर रहे हैं मजे शिकायत कर्तायो  कि शिकायत पर कार्रवाई हुई क्या कार्रवाई हुई यह नहीं पता जांच प्रतिवेदन गायब आखिर फिर किस बात की जानकारी किसको मिलेगी जांच प्रतिवेदन किसने गायब किया यह
*हमारे सवाल मुख्य कार्यपालन अधिकारी से है*
मध्य प्रदेश के ग्वालियर के घाटीगाँव बरई में लगातार भ्रष्टाचार के मामले बढ़ते जा रहे हैं मामले इसलिए बढ़ रहे हैं सत्ता और प्रशासन की मिली भगत से लगातार लाखों करोड़ों रुपए के गफले बाजी चल रही है मध्य प्रदेश सरकार की मंशा है कि आदिवासी क्षेत्र में महिला आदिवासी अगर प्रतिनिधित्व करती है तो उसे एक अलग भूमिका में माना गया है इधर यह मामला उल्टा होता जा रहा है उल्टा शब्द हम इसलिए कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश सरकार की मनसा को पलीता लगाते हुए नजर आ रही है जनपद सीईओ बरई घाटीगांव सूत्र बताते हैं कि 2 से 4 परसेंट तक कमीशन के बाद सचिव की फाइल साइन होती है पर अगर इस तरीके का भ्रष्टाचार बढ़ता जाएगा तो गुणवत्ता बिन कम होना लाजमी है हम आपको बता दें कि
ग्राम पंचायत पाटई आज  दिन तक जिम्मेदार व्यक्ति तय नहीं हुआ ग्वालियर की गजब ग्राम पंचायत पाटई जिसमें वर्ष 2024, 2025 में शिकायत होती है और शिकायत में जांच गठित होती है लेकिन आज दिन तक वह जांच गठित होकर जांच दल अपनी रिपोर्ट पेश नहीं करता है आखिर जनपद पंचायत की मुखिया इतनी उदासीनता में क्यों है क्या सिर्फ परसेंटेज के खेल पर ही जिंदा है या फिर भ्रष्ट अफसर साहब पर भी कार्रवाई करेंगे केसरिया हिंदुस्तान की टीम ने जब उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करना चाहा तो मैडम ने मोबाइल उठना लाजमी नहीं समझा ग्राम पंचायत पाटई में गजब मामला जब आया तब केसरिया हिंदुस्तान की टीम जनपद अध्यक्ष पति बरई घाटीगांव से सवाल पूछा क्या यह पंचायत आप चला रहे हैं तो उन्होंने कहा यह सब राजनीतिक बातें हैं मैं पूर्व सरपंच हूं पंचायत नहीं चला रहा केसरिया हिंदुस्तान  का सीधा सवाल है आप
  *जनपद अध्यक्ष  घाटीगांव नहीं  है उसके बावजूद भी प्रमाण पत्र कैसे बांट सकते हैं जनपद अध्यक्ष पति दिलीप रावत*
 जिला पंचायत के मुखिया मुख्य कार्यपालन अधिकारी के बगल से आप खड़े होकर किस  हेसियत से प्रमाण पत्र वितरण कर रहे थे इससे व्यथित होता है कि सत्ता और प्रशासन में अच्छी पकड़ रख प्रशासन को लगवा रहे लाखों का चुना
जिम्मेदार की चुप्पी राजनेता चल रहा है जनपद पंचायत बरई घाटीगांव  पाटई  इस पंचायत में जो चेक डैम बड़ी-बड़ी धनराशि के बनाए गए आखिर वह चेक डेम   कहां है अगर चेक डेम नहीं है तो जांच अधिकारियों ने अभी तक जांच क्यों नहीं की हम आपको बताना चाहते हैं भ्रष्टाचार के तहत तक हम आपको लेकर जाएंगे किसने कितना हिस्सा लिया उसकी बात भी आप तक लेकर सामने आएंगे *प्रशासन जाग जाए अन्यथा EOW कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बरई घाटीगांव में जो मुखिया है वह भी तारीख करने जाएंगी* हम आपको बता दें कि सत्ता और राजनेता मिलकर लगातार भ्रष्टाचार को बढ़ाते जा रहे हैं जांच ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है और जिम्मेदार मौज उड़ा रहे हैं इस पंचायत की भ्रष्टाचार की पोल हम अगले बुधवार को फिर खोलेंगे जिसमें कोशिश होगी भ्रष्ट अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाए जिला पंचायत ग्वालियर में मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संज्ञान में नहीं रहते कई मामले बाबू कर रहे हैं मजे शिकायत कर्तायो  कि शिकायत पर कार्रवाई हुई क्या कार्रवाई हुई यह नहीं पता जांच प्रतिवेदन गायब आखिर फिर किस बात की जानकारी किसको मिलेगी जांच प्रतिवेदन किसने गायब किया यह *हमारे सवाल मुख्य कार्यपालन अधिकारी से है*
सत्येंद्र सिंह सचिव फर्जी बिल बनाकर हड़प्पे लाखों रुपए
ग्राम पंचायतों में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर उठे सवाल, सचिव की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान; जनपद से जिला पंचायत तक जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल।
. ग्राम पंचायत पाटई पंप चालक को 21 हजार रुपये का भुगतान, खर्च का विवरण गायब
ग्राम पंचायत पाटई में सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध खर्च वाउचर के अनुसार, दिनांक 03/06/2026 को पंप चलाने वाले व्यक्ति के नाम पर 21 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। वाउचर में पंजाब नेशनल बैंक का खाता क्रमांक पार्टी के रूप में दिखाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पंप चालक को किस कार्य के लिए एकमुश्त 21 हजार रुपये दिए गए। क्या यह वेतन था या किसी अन्य कार्य का भुगतान? वाउचर में इसका कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। ऐसे में सरकारी राशि के भुगतान की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
2.
 *ग्राम पंचायत पाटई: सरपंच के नाम पर 3 हजार रुपये का मानदेय, भुगतान का हिसाब स्पष्ट नहीं*
ग्राम पंचायत पाटई में दूसरा मामला सामने आया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, दिनांक 07/06/2026 को सरपंच के नाम पर 3 हजार रुपये मानदेय के रूप में भुगतान दर्शाया गया है। सवाल यह है कि क्या सरपंच का निर्धारित मानदेय वास्तव में 3 हजार रुपये है? यदि भुगतान किया गया है तो किस खाते में राशि भेजी गई और इसका पूरा विवरण रिकॉर्ड में क्यों स्पष्ट नहीं है? इस भुगतान को लेकर भी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है।
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
3.
*संजय कुमार जाटव: 5 हजार रुपये का भुगतान, सरपंच के हस्ताक्षर और ट्रांजैक्शन आईडी गायब*
तीसरे मामले में संजय कुमार जाटव के नाम पर दिनांक 09/08/2026 को 5 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। बताया गया है कि यह भुगतान फोटो कॉपी के बिल के आधार पर ई-पेमेंट के माध्यम से किया गया। हैरानी की बात यह है कि उपलब्ध बिल में कार्य का विवरण भी काटा हुआ दिखाई दे रहा है। साथ ही बिल पर सरपंच के हस्ताक्षर भी नजर नहीं आ रहे हैं। सवाल यह है कि बिना सरपंच के हस्ताक्षर के भुगतान किस आधार पर किया गया? यदि भुगतान ई-पेमेंट से हुआ तो ई-पेमेंट क्रमांक और ट्रांजैक्शन आईडी का उल्लेख क्यों नहीं है?
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
4. *ग्राम पंचायत: जितेंद्र सिंह को मोटर के कार्य के नाम पर 10 हजार रुपये का भुगतान, हस्ताक्षर गायब*
चौथे मामले में जितेन्द्र सिंह पिता सोनेराम के नाम पर दिनांक 09/08/2026 को पानी की मोटर निकलवाने, दोबारा डलवाने और मरम्मत कराने के नाम पर 10 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। सवाल यह है कि क्या नई मोटर खरीदी गई थी या पुरानी मोटर में मरम्मत अथवा नए उपकरण लगाए गए थे? यदि मरम्मत कराई गई तो उसका विस्तृत बिल और कार्य का विवरण कहां है? उपलब्ध दस्तावेज में सरपंच के हस्ताक्षर भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया और उसकी स्वीकृति पर सवाल उठ रहे हैं।
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
  *जनपद से जिला पंचायत तक जांच की मांग*
इन चारों मामलों में भुगतान के दस्तावेजों, बिलों, सरपंच के हस्ताक्षरों, बैंक खातों और ई-पेमेंट ट्रांजैक्शन की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यदि किसी भी स्तर पर सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायतों में सरकारी धन के खर्च की निगरानी कौन कर रहा है? क्या जनपद पंचायत और जिला पंचायत के अधिकारियों ने इन भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की है?
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन मामलों की जांच कराते हैं या फिर सरकारी धन के भुगतान में उठ रहे सवालों को यूं ही अनदेखा किया जाता रहेगा।
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