बरघाट की धरती पर अदृश्य’ विकास फाइलें भरीं जेबें गरम हुईं पर गांव की सड़कें आज भी खोज रही हैं अपना अस्तित्व

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दैनिक केसरिया हिंदुस्तान जिला ब्यूरो चीप सिवनी

कागजों पर दौड़ी विकास की बुलेट ट्रेन जमीन पर सिर्फ धूल और भ्रष्टाचार का सन्नाटा धापारा गंगेरुआ का महा-घोटाला
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान से प्रकाशित खबर पैनी नजर जनपद पंचायत बरघाट के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धापारा गंगेरुआ से ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पंचायत व्यवस्था की जड़ों तक हिला दी हैं गांव में विकास के नाम पर ऐसा खेल खेला गया कि अब ग्रामीण खुलकर कहने लगे हैं यहां योजनाएं जमीन पर नहीं सिर्फ फाइलों में बन रही हैं सूत्रों और शिकायतों के अनुसार वर्ष 2023-24 और2024-25 के दौरान 14वें 15वें एवं पंचम वित्त की राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगा है मामला सिर्फ गड़बड़ी का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करने वाला बताया जा रहा है कागजों में सड़क जमीन पर मिट्टी और सन्नाटा ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों रुपए निकाल लिए गए लेकिन धरातल पर उनका कोई अस्तित्व तक दिखाई नहीं देता सबसे बड़ा आरोप सीसी सड़क निर्माण कार्यों को लेकर सामने आया है जहां कथित रूप से बिना काम पूरा हुए ही भुगतान कर दिया गया गांव में चर्चा है कि बिना मूल्यांकन के बिल-वाउचर पास किए गए नियमों को ताक पर रखकर भुगतान हुआ कई कार्यों की मौके पर स्थिति शून्य बताई जा रही है लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में विकास पूर्ण दिखाया गया है यानी सवाल सीधा है क्या पंचायत में काम कम कागज ज्यादा का खेल चल रहा था जनता का पैसा और सिस्टम की चुप्पी शिकायतकर्ता ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बरघाट को दिए आवेदन में मांग की है कि सभी बिल-वाउचर की जांच हो निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े भुगतान किसकी निगरानी में हुए क्या जिम्मेदार अधिकारी सब जानते हुए भी मौन बने रहे या फिर पूरा सिस्टम मिलकर कागजी विकास का साम्राज्य चला रहा था गांव में उबाल हमारे हिस्से का विकास किसने निगला ग्रामीणों में भारी आक्रोश बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जिन योजनाओं से गांव की तस्वीर बदलनी थी वे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं जहां सड़कें होनी चाहिए थीं वहां धूल उड़ रही है जहां विकास होना चाहिए था वहां सिर्फ फाइलों का ढेर खड़ा है गांव के बुजुर्गों का कहना है अगर जांच ईमानदारी से हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं बरघाट में उठता सबसे बड़ा सवाल क्या पंचायतों में विकास अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है क्या सरकारी धन को योजनाबद्ध तरीके से ठिकाने लगाया जा रहा है क्या जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव है और सबसे बड़ा सवाल क्या प्रशासन इस बार कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा
बड़े आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं क्या सच सामने आएगा या कागजी विकास का यह खेल यूं ही चलता रहेगा

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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