जितेन्द्र कुमार शर्मा
संवाददाता पूरनपुर/पीलीभीत
दैनिक केसरिया हिन्दुस्तान
आरबीआई के नियमों को दरकिनार कर खुलेआम चल रही अवैध बिक्री, जिम्मेदार कौन।
पूरनपुर पीलीभीत :- शहर में 10 रुपये के नोटों की गड्डियों को लेकर अजीब स्थिति सामने आ रही है। जहां एक ओर आम जनता को बैंकों में 10 के नोट आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यही गड्डियां खुले बाजार में 1500 से 1800 रुपये तक में बेची जा रही हैं। इस स्थिति ने बैंकिंग व्यवस्था और नियामक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राहकों का कहना है कि जब वे बैंक शाखाओं में छोटे नोटों की मांग करते हैं, तो उन्हें “स्टॉक उपलब्ध नहीं” कहकर लौटा दिया जाता है। लेकिन वहीं, बाजार में कुछ दलाल और व्यापारी इन नोटों की गड्डियां ऊंचे दामों पर बेचते नजर आ रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में खामी है और नियमों का उल्लंघन हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कालाबाजारी बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं है। बैंक कर्मचारियों, नकदी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोगों या निजी एजेंटों की भूमिका की जांच जरूरी है। यदि नोटों की आपूर्ति सही तरीके से हो रही है, तो फिर यह कमी केवल आम उपभोक्ताओं के लिए ही क्यों?
इस मामले में नियामक संस्था की जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में है। छोटे नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उनकी कालाबाजारी रोकना संबंधित अधिकारियों का दायित्व है। बावजूद इसके, यदि खुलेआम इस तरह का कारोबार चल रहा है, तो यह व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।स्थानीय प्रशासन और बैंकिंग अधिकारियों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर तुरंत संज्ञान लें, जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें और आम जनता को राहत दिलाएं। अन्यथा यह समस्या आगे चलकर और गंभीर रूप ले सकती है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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