दैनिक केसरिया हिंदुस्तान/जिला ब्यूरो भूपेंद्र सिंह गंभीर
एमसीबी/मनेंद्रगढ़
220 बिस्तरीय चिकित्सालय मनेंद्रगढ़ के चिकित्सकों ने अपनी तत्परता, कुशलता और समर्पित सेवाभाव का परिचय देते हुए दो गंभीर दुर्घटना पीड़ित मरीजों की जान बचाकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों मरीजों की स्थिति अत्यंत गंभीर थी और चिकित्सकों के अनुसार उपचार में थोड़ी भी देरी होती तो उनकी जान जा सकती थी। पहला मामला 15 वर्षीय विनीत इक्का का था, जिसे गंभीर सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल लाया गया। दुर्घटना में उसके सिर पर गहरी चोट लगी थी तथा गर्दन की हड्डी भी टूट गई थी। अस्पताल पहुंचने पर उसकी हालत बेहद नाजुक थी और वह ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था। चिकित्सकों ने तत्काल स्थिति का आकलन करते हुए उसकी गर्दन को सुरक्षित रखने के लिए सी-कॉलर (C-Collar) लगाकर उसे इमोबिलाइज किया। इसके बाद सांस लेने में आ रही गंभीर समस्या को देखते हुए उसके मुंह के माध्यम से एंडोट्रेकियल ट्यूब (Endotracheal Tube) डालकर श्वसन मार्ग सुनिश्चित किया गया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।
दूसरा मामला 22 वर्षीय अविनाश का था, जो सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था। उसके सीने में गंभीर चोट लगी थी और सबक्यूटेनियस एम्फाइसीमा के कारण शरीर के ऊतकों में हवा भरने लगी थी। स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तुरंत उसकी छाती में इंटरकॉस्टल ड्रेनेज ट्यूब (ICD) स्थापित की, जिससे फेफड़ों पर पड़ रहा दबाव कम हुआ और मरीज की स्थिति नियंत्रित की जा सकी।
चिकित्सकों ने बताया कि दोनों मरीजों का उपचार अत्यंत चुनौतीपूर्ण था और सामान्यतः ऐसे मामलों का उपचार मेडिकल कॉलेज स्तर के अस्पतालों में किया जाता है। लेकिन मनेंद्रगढ़ के 220 बिस्तरीय चिकित्सालय में उपलब्ध सुविधाओं, अनुभवी चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने मात्र एक से डेढ़ घंटे के भीतर दोनों मरीजों की स्थिति को स्थिर कर उनकी जान बचाने में सफलता प्राप्त की।
इस सफल उपचार में डॉ. राजीव गुप्ता, डॉ. विनीत विश्वकर्मा, ईएमटी मुकेश शर्मा, आकांक्षा एवं हर्ष की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरी टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए समय पर आवश्यक चिकित्सकीय निर्णय लिए और मरीजों को जीवनदान देने में सफलता हासिल की।
यह उपलब्धि न केवल मनेंद्रगढ़ 220 विस्तरीय चिकित्सालय की चिकित्सा क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि समर्पित चिकित्सकीय टीम और बेहतर प्रबंधन के बल पर जिला स्तर के अस्पताल भी मेडिकल कॉलेज जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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