बुरहान शहीद बाबा की मज़ार पर उर्स संपन्न हज़रत बुरहान शहीद बाबा का उर्स बना हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ट पत्रकार शहंशाह आब्दी रहे मौजूद

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केसरिया हिंदुस्तान
ब्यूरो चीफ दिव्यांश प्रताप सिंह

फतेहपुर 5 जून ।
हज़रत बुरहान शहीद बाबा रहमत उल्लाह अलैह का 162 वां सालाना उर्स मुकद्दस आयोजित हुआ जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मज़ार पर दुआ मांगी।इस मौके पर लखनऊ के जाने-माने कव्वाल सुहेल दिलकश वारसी तथा दिल्ली की बेबी जरा वारसी के बीच कव्वाली का शानदार मुकाबला हुआ शुरुआत हम्द,नात,मनक़बत से हुई और समापन शहादत तथा सलाम के साथ हुआ।इस बीच गजलों का भी दौर चला जिसमें सामईन लुत्फ अंदोज हुए।कमेटी के अध्यक्ष सभासद प्रतिनिधि कैफ़ी भाई के नेतृत्व में माला पहनाकर फनकारों का इस्तकबाल किया।मर्दों के साथ-साथ औरतों की खासी तादाद मौजूद रही।भारी भीड़ के बीच फनकारों ने अपने कलाम से दिल जीत लिया।
कमेटी के सदर सभासद प्रतिनिधि कैफ़ी भाई, हाजी सरशार अली पप्पी,डॉ शमशाद,मोहम्मद अलकाब,मोहम्मद जसीम, मोहम्मद शाहिद,फहद करीम,मोहम्मद इरफान मोहम्मद जुनैद,हारून कुरैशी, मो.शादाब,मो.तौसीफ, मो.अंसार,फरमान अली,हामिद रजा,अख्तर अली,अल्फिशान,मो.नाजिमकप्तान,मो.रिजवान,शीबू इकराम,शहाबुद्दीन,मुन्ना राईन,मो.नासिर,मो.वसी मोहम्मद अयान,मोहम्मद कोनैन,मोहम्मद शाहिद,जुनैद अहमद,मोहम्मद इम्तियाज, दिलशाद बावर्ची,मोहम्मद जुबैर आदि कमेटी के सदस्यों ने व्यवस्था संभाली और प्रोग्राम को कामयाब बनाया। खास मेहमानों में जिला पंचायत सदस्य सूबेदार चंद्रशेखर,इश्तियाक शेख,गुड्डू प्रधान मुआरी,सैयद मोहसिन हसन,सैयद मोहम्मद रेहान अहमद,जाहिद सराय,वसीम घोसी,आसिफ प्रधान,पन्ना सभासद,शमीम सभासद,गनी भाई टाइल्स,शकील प्रधान,पत्रकार शहंशाह आब्दी,कवि एवं शायर शिव शरण बंधु हथगामी,युवा कवि शिवम हथगामी आदि अनेक मुअज्जिन हज़रात मौजूद रहे।
*फनकारों ने सुनाए शानदार कलाम*
देश की राजधानी दिल्ली से तशरीफ़ लाई बेबी जारा वारसी तथा राजधानी लखनऊ से आए सुहैल दिलकश वारसी ने कलाम पेश किए।दिलकश वारसी ने पढ़ा-सभी मकाम से उसका मकाम अफजल है,खुदा के बाद मोहम्मद का नाम अफजल है।उसने कहा था चल किसी कुटिया में रहते हैं,मैं उसके लिए ताजमहल छोड़ रहा हूं।जब से शराब छोड़ी नशा और बढ़ गया।रोज ख्वाबों में आ रहे हो तुम,दिल की धड़कन बढ़ा रहे हो तुम,है मोहब्बत तो पास आ जाओ, दूर से क्यों सता रहे हो तुम। आंसू यूं मेरी जान बहाया न कीजिए,अजी मोतियों को ऐसे लुटाया न कीजिए।
बेबी जारा वारसी दिल्ली ने बेहतरीन कलाम सुनाए।रंज,अलम देते हैं,गम देते हैं,इतना देने पे भी कहते हैं कि कम देते हैं,सुबह के वक्त जब मुअज्जन ने दी अजां,हम ये समझे कि हमें आवाज सनम देते हैं।इंसान झुक ही जाता है इकलाख देखकर,वो आंखें फेर लेता है हालात देखकर,चाहे किताबें पढ़ लो या दीवान चाट लो,अल्लाह इल्म देता है औकात देखकर। वह खुशनसीब कहानी तलाश करता है,गजल में अपनी जवानी तलाश करता है,कि उस मकाम पे पहुंची है तिश्नगी अपनी,नदी में बैठके पानी तलाश करता है।नजर रखते हैं हर तरफ देखा नहीं करते,पराई चीज पे हम तो कभी कब्जा नहीं करते,हम अपनी आबरू को जान से ज्यादा समझते हैं,ग़मों को बेचते हैं जिस्म का सौदा नहीं करते।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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