मिर्जापुर में कांशीराम विशुन्दरपुर आवास योजना में फर्जी आवंटन और किराया वसूली डूडा की सख्त कार्रवाई, जांच और कानूनी रिकवरी की मांग

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शशि भूषण दूबे कंचनीय/संतोष यादव डंगहर

मिर्जापुर। नगर विकास विभाग के अधीन डूडा (DUDA) ने कांशीराम विशुन्दरपुर आवास योजना में फर्जी तरीके से आवास हासिल करने वालों और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की टीमों ने प्रभावित मकानों पर नोटिस चस्पा किए हैं और चेतावनी दी है कि तय समय में संतोषजनक जवाब न देने पर आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र और जरूरतमंद व्यक्तियों तक पहुंचना चाहिए।
फर्जीवाड़े की शिकायतें और जांचयोजना के तहत आवास आवंटन में गड़बड़ियों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभ लेने की कई शिकायतें मिलने के बाद डूडा अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सत्यापन किया। जिन मकानों में अनियमितताएं पाई गईं, वहां नोटिस लगाए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से आवंटन प्राप्त कर मकानों को किराए पर दे रखा था, जबकि पात्र लाभार्थी इंतजार कर रहे थे।
सरकारी नियमों और कानून के अनुसार जरूरी कार्रवाई:फर्जी किराया वसूली की रिकवरी: जिन व्यक्तियों ने फर्जी अवैध कब्जे या अनियमित आवंटन के आधार पर मकान किराए पर दिए, उनसे वसूला गया किराया सरकारी खाते में जमा कराया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश शहरी गरीब आवास योजनाओं (जैसे मान्यवर श्री कांशीराम जी शहरी गरीब आवास योजना) के तहत ऐसे लाभार्थी अपात्र माने जाते हैं और प्राप्त लाभ की वसूली की जा सकती है।फर्जी आवंटन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई: यदि आवंटन में भ्रष्टाचार, मिलीभगत या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर IPC की धाराओं (जैसे धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए।समयावधि की जांच: आवंटन कब हुआ था?कितने समय से फर्जी अवैध कब्जाधारियों ने किराया वसूला?यह जांच अनिवार्य है ताकि पूर्ण रिकवरी और दंड सुनिश्चित हो। लंबे समय से चल रही गड़बड़ी में ब्याज सहित रिकवरी की मांग की जा सकती है।PMAY-U और कांशीराम योजना की गाइडलाइंसकांशीराम शहरी गरीब आवास योजना उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए आवास उपलब्ध कराती है। यह प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से भी जुड़ी हो सकती है। PMAY-U गाइडलाइंस के अनुसार: लाभार्थी चयन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।फर्जी जानकारी देने या छिपाने पर आवंटन रद्द किया जा सकता है और सब्सिडी लाभ की रिकवरी की जाती है।मकान को 5 वर्ष तक बेचना, ट्रांसफर या किराए पर देना प्रतिबंधित है (कई मामलों में)।
अपात्र पाए जाने पर खाली करने का नोटिस और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।DUDA/SUDA (State Urban Development Agency) ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन करती है। अवैध कब्जे या फर्जी आवंटन पर प्रशासन पहले भी अल्टीमेटम जारी कर चुका है, जैसे चुनार कांशीराम आवास में अवैध कब्जाधारियों को एक सप्ताह में खाली करने के निर्देश। विभाग का संकेत और अपीलडूडा ने स्पष्ट किया है कि यदि नोटिस का जवाब नहीं दिया गया तो आगे कड़ी कार्रवाई होगी, जिसमें मकान खाली कराना, रिकवरी और मुकदमा शामिल हो सकता है। आमजन से अपील की जाती है कि यदि उनके पास कोई सबूत या अतिरिक्त जानकारी हो तो वे डूडा कार्यालय या जिला प्रशासन में शिकायत दर्ज कराएं।सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता की नीति के तहत यह कार्रवाई सराहनीय है। पूर्ण जांच, समयबद्ध रिकवरी और दोषियों (चाहे लाभार्थी हों या अधिकारी) पर कार्रवाई से पात्र गरीबों को न्याय मिलेगा।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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