अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के बीकापुर तहसील अंतर्गत ग्राम सभा पूरब पट्टी में पैतृक भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश सरकार जहां भूमाफियाओं पर सख्त कार्रवाई और महिलाओं को न्याय दिलाने के दावे कर रही है, वहीं पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने में लगा है।
पीड़िता नीरजा पाण्डेय का आरोप है कि गाटा संख्या 145 व 148 उनकी पैतृक भूमि है, जिस पर कथित रूप से टीनशेड डालकर फास्टफूड की दुकान संचालित की जा रही है। उनका कहना है कि वर्ष 2025 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा राजस्व टीम और पुलिस बल की मौजूदगी में पैमाइश कर कब्जा हटाने का आदेश दिया गया था, लेकिन आज तक उस आदेश पर अमल नहीं कराया गया।
महिला ने आरोप लगाया कि कई शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पीड़िता के अनुसार उन्हें यहां तक कहा गया कि “अगर कब्जा हटवाना है तो खुद जाकर हटवा लो।” इस कथित बयान के बाद प्रशासनिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर सवाल उठने लगे हैं।
वहीं मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर उपजिलाधिकारी बीकापुर ने पहले कहा था कि “पुराना आदेश समाप्त हो चुका है, नया आदेश आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।” बाद में दोबारा संपर्क किए जाने पर उन्होंने कहा, “तहसील में आ जाइए, यहीं पर बता देंगे क्या कार्रवाई की गई।” हालांकि फोन पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
मामले में जिलाधिकारी अयोध्या से संपर्क करने का भी प्रयास किया गया, लेकिन फोन उनके पीआरओ द्वारा उठाया गया और यह कहकर कॉल समाप्त कर दी गई कि “साहब मीटिंग में हैं।”
अब पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आदेश जारी होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही, तो आम जनता न्याय के लिए आखिर किस पर भरोसा करे। वहीं यह भी चर्चा है कि यदि भूमि विवाद को लेकर भविष्य में कोई अप्रिय स्थिति पैदा होती है, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
Author: Dainik kesariya Hindustan
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