केवलारी पंचायत में 6 करोड़ 78 लाख के कथित घोटाले पर बवाल जांच के नाम पर बचाव अभियान के आरोपों से मचा भूचाल

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केवलारी जनपद पंचायत का करोड़पति खेल जमीनी जांच से क्यों भाग रहे अधिकारी बड़े मगरमच्छों को बचाने की उलटी गिनती शुरू
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान जिला सिवनी

सिवनी जिले की जनपद पंचायत केवलारी इन दिनों कथित भ्रष्टाचार, तकनीकी कार्यालय में बैठकर तैयार हो रहे जवाब ग्रामीण बोले जमीनी जांच नहीं भ्रष्टाचार बचाने का खेल चल रहा मिलीभगत और जांच प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवालों के कारण सुर्खियों में आ गई है लगभग 6 करोड़ 78लाख 20 हजार रुपये की शासकीय राशि से जुड़े निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जारी जांच आदेश ने पंचायत और तकनीकी अमले में हड़कंप मचा दिया है लेकिन अब इस पूरे मामले में ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने जांच की निष्पक्षता पर ही सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है आरोप है कि जिन सहायक यंत्री दुर्गा कुमारे के हस्ताक्षर संबंधित निर्माण कार्यों के कारपूर्णता प्रमाण पत्रों में दर्ज हैं वही अब इन कार्यों की जांच रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। शिकायतकर्ताओं और ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति खुद ही आरोपी खुद ही जांच अधिकारी जैसी दिखाई दे रही है इससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता कटघरे में खड़ी हो गई है सूत्रों के अनुसार शिकायत में दर्ज 28 निर्माण कार्यों में सड़क पुलिया नाली और अन्य अधोसंरचना कार्य शामिल हैं आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई कार्यों में बिना गुणवत्ता के भुगतान कर दिया गया जबकि कुछ निर्माण कार्य कागजों में ज्यादा और जमीन पर कम दिखाई दे रहे हैं ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और कई जगहों पर काम शुरू होते ही उखड़ने लगे सबसे गंभीर आरोप यह लगाए जा रहे हैं कि जांच के नाम पर सिर्फ कार्यालयों में बैठकर जवाब तैयार किए जा रहे हैं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मौके पर वास्तविक निरीक्षण करने के बजाय फाइल मैनेजमेंट और जवाबी पत्रों के जरिए पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है इससे लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच जिला स्तर से हटाकर किसी स्वतंत्र उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए ताकि पंचायत तकनीकी अमले और कथित संरक्षण देने वाले जिम्मेदार लोगों की भूमिका खुलकर सामने आ सके। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में छोटे कर्मचारी ही कार्रवाई की जद में आएंगे और बड़े स्तर पर बैठे संरक्षणदाता बच निकलेंगे अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या करोड़ों रुपये के इस कथित खेल की सच्चाई सामने आएगी या फिर जांच की फाइलें भी सिस्टम की अलमारियों में दबकर रह जाएंगी

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Author: Dainik kesariya Hindustan

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