भीकनगांव।सवांददाता। बसंत प्रजापत क्षेत्रीय विधायक झूमा सोलंकी के पुस्तैनी गांव बढ़िया-गोविंदपुरा पंचायत में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। नगर से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित पंचायत में नल-जल योजना की पाइपलाइन और घर-घर नल कनेक्शन होने के बावजूद ग्रामीण आज भी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि महिलाओं, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं तक को भीषण गर्मी में हैंडपंप और कुओं पर कतार लगानी पड़ रही है।
ग्रामीणों के अनुसार शासन ने करीब 6 वर्ष पहले नल-जल योजना के तहत गांव में पाइपलाइन बिछाकर घर-घर नल लगाए थे, लेकिन आज तक अधिकांश घरों में शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच पाया। कहीं पानी आता ही नहीं, तो कहीं गंदा, बदबूदार और पीला पानी सप्लाई हो रहा है।
6 साल बाद भी नहीं पहुंचा साफ पानी
बढ़िया पंचायत के चमेली चौकी पाल्या में पाइपलाइन तो डाल दी गई, लेकिन योजना आज तक शुरू नहीं हो सकी। वहीं सुल्तानपुरा और बढ़िया गांव में पिछले एक साल से नल-जल योजना पूरी तरह बंद पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें करने के बावजूद पंचायत और जनपद स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
गोविंदपुरा और ढाटापूरा पाल्या की महिलाओं ने बताया कि नलों में आने वाला पानी दूसरे ही दिन बदबू देने लगता है और पीला पड़ जाता है। मजबूरी में पीने के लिए दूर स्थित कुओं और हैंडपंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
“गंदा पानी पीने को मजबूर”
घाटी पलिया निवासी भाईराम मंडलोई ने बताया कि पाइपलाइन कई जगह से फूटी हुई है और नलों में मटमैला पानी आता है। सरपंच और सचिव को कई बार बताया गया, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
युवराज कनोजे ने बताया कि उन्हें करीब एक किलोमीटर दूर पुल के पास लगे हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है, जबकि गांव का एकमात्र हैंडपंप चार साल से बंद पड़ा है।
गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी
ढाटापूरा पाल्या की हेमलता डुडवे और रेखा डुडवे ने बताया कि यहां चार हैंडपंप हैं, जिनमें से एक में गंदा पानी आता है और दो मुश्किल से चलते हैं। एकमात्र चालू हैंडपंप बंद हो जाए तो एक किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि तालाब के कुएं से सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। उसमें जंतु पड़ जाते हैं और पानी पीला हो जाता है। पिछले आठ दिनों तक मोटर खराब रहने से पानी सप्लाई पूरी तरह बंद रही।
“नल-जल योजना की मोटर कबाड़ में पड़ी”
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में नई मोटर पिछले 12 महीनों से लाकर रखी गई है, लेकिन उसे चालू नहीं किया गया। पुरानी जली हुई मोटर से ही किसी तरह पानी सप्लाई की कोशिश की जा रही है। कई जगह मोटर जलने और डीपी खराब होने के कारण योजना बंद पड़ी है।
सुल्तानपुरा पलिया में 1200 की आबादी के बीच सात हैंडपंप हैं, जिनमें से चार खराब पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नल खोलने वाले कर्मचारी की दुर्घटना में मौत के बाद से योजना पूरी तरह बंद है।
हैंडपंप और कुओं पर निर्भर हजारों ग्रामीण
बढ़िया गांव में करीब 70 लाख रुपए की लागत से पानी की टंकी और पाइपलाइन बनाई गई थी, लेकिन पिछले एक साल से नलों में पानी नहीं आया। गांव के लोग रोजाना हैंडपंप और आधा किलोमीटर दूर स्थित कुओं से पानी भरने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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