रीवा मंडी में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल, जांच की आंच तेज

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भूपेंद्र सिंह दैनिक केसरिया हिंदुस्तान

रीवा। मध्य प्रदेश की मंडी व्यवस्था पहले से ही सवालों के घेरे में रही है, और अब रीवा मंडी से सामने आया नया मामला पूरे सिस्टम पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है। ताजा आरोपों के मुताबिक मंडी के जिम्मेदार अधिकारी—सचिव कमलेश तिवारी एवं विष्णु शुक्ला पर भारी लेन-देन कर वाहनों को छोड़ने का आरोप लगा है, जिससे मंडी में “सेटिंग और सौदेबाजी” का खेल उजागर होता नजर आ रहा है।
गाड़ी पकड़कर लाखों में सौदा, फिर छोड़ने का आरोप
सूत्रों के अनुसार हाल ही में रीवा मंडी में एक वाहन को पकड़कर मंडी लाया गया, लेकिन बाद में कथित तौर पर लाखों रुपये के लेन-देन के बाद उसे छोड़ दिया गया। यह मामला सामने आने के बाद उच्च अधिकारियों ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। इसी तरह के आरोप पहले भी मंडी तंत्र में सामने आते रहे हैं, जहां कार्रवाई के बजाय “समझौता” हावी रहता है।
रीवा मंडी के सचिव कमलेश तिवारी एवं अन्य कर्मचारियों का जीरो प्रेजेंट, फिर भी पूरा वेतन
सबसे बड़ा खुलासा कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर है। आरोप है कि कई कर्मचारी “जीरो प्रेजेंट” यानी बिना ड्यूटी किए भी पूरा वेतन निकाल रहे हैं। इससे साफ है कि मंडी में उपस्थिति और वेतन प्रणाली में भी भारी अनियमितता चल रही है।
रीवा में “डिजिटल ड्यूटी घोटाला” जैसे मामलों में भी यह सवाल उठ चुका है कि क्या कर्मचारी घर बैठे ही हाजिरी लगाकर वेतन ले रहे हैं।
करोड़ों के घोटाले की आशंका
अगर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह घोटाला करोड़ों तक पहुंच सकता है। पहले भी रीवा मंडी बोर्ड में वित्तीय अनियमितताओं पर लाखों की वसूली नोटिस जारी हो चुकी है, जो इस सिस्टम की गड़बड़ी को दर्शाता है।
पूरे प्रदेश में मंडी व्यवस्था पर सवाल
यह मामला सिर्फ रीवा तक सीमित नहीं है। प्रदेश भर में मंडियों में भ्रष्टाचार, दलाली और किसानों के शोषण की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार तौल में गड़बड़ी, फर्जी कटौती, रिश्वत और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं आम हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हाल ही में गुना जिले में भी एक सर्वेयर द्वारा किसान से रिश्वत लेने का वीडियो सामने आया, जिसने पूरे मंडी सिस्टम की सच्चाई उजागर कर दी।
बड़ा सवाल
जब एक तरफ सरकार कर्ज लेकर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ मंडी जैसे विभागों में भ्रष्टाचार खुलेआम जारी है—तो आखिर जिम्मेदार कौन?
मांग और चेतावनी
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
दोषी अधिकारियों पर सस्पेंशन और एफआईआर दर्ज हो
मंडी में डिजिटल पारदर्शिता और बायोमेट्रिक सिस्टम लागू किया जाए
किसानों और व्यापारियों को सीधा न्याय मिले
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला बड़े आंदोलन और घेराव तक पहुंच सकता है। रीवा मंडी का यह खुलासा अब पूरे प्रदेश की मंडी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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