दैनिक केसरिया हिंदुस्तान पंकज जैन
अम्बाह। मुरैना। दिल्ली। हिंसा का अर्थ प्रायः दूसरे को मारना, सताना या फिर उसका धन लेना, चोरी करना आदि तक तो समझा जाता है, परंतु किसी का समय खराब करना भी हिंसा होता है -इस बात की ओर प्रायः किसी का भी ध्यान नहीं जाता है, जबकि यह भी एक बहुत बड़ी हिंसा है। यदि किसी का धन छीना जाए तो वह फिर से कमा लेगा, परंतु यदि हम किसी का समय छीनेंगे तो वह उसे फिर नहीं कमा सकेगा। मनुष्य भव का एक-एक क्षण अमूल्य है और हम अनेक बार लापरवाही से व्यक्ति के उस अमूल्य समय को बर्बाद करने का कारण बन जाते हैं। यह बहुत बड़ी हिंसा है। हमें इसकी ओर गंभीरतापूर्वक ध्यान देना होगा। दूसरों को विकथाएं सुनाकर तो हम उनका अमूल्य समय खराब करते ही हैं, पर गलत कार्यक्रम करके, गलत/व्यर्थ मैसेजेज या क्लिप आदि भेजकर भी लोगों का अमूल्य समय खराब करते हैं। यह बहुत बड़ी हिंसा है, पाप है। हमें इसकी ओर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा और इस बुरी आदत को छोड़ना होगा। तभी हम सही अर्थों में अहिंसक कहलाने के अधिकारी बनेंगे।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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