डॉ शिल्पी सिंह विद्यालय सर्वेक्षण केवल प्रायोगिक कार्य की औपचारिकता नहीं

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ब्यूरो सुल्तानपुर
तकी मेंहदी
शिक्षाशास्त्र विभाग में ‘विद्यालय सर्वेक्षण’ पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित
सुलतानपुर। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा बी.ए. द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक कार्य के अंतर्गत “विद्यालय सर्वेक्षण का उद्देश्य, प्रक्रिया एवं महत्व ” विषय पर एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को फील्ड वर्क से पूर्व सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक तैयारी प्रदान करना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष *डॉ. शिल्पी सिंह* ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। डॉ. शिल्पी सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि “विद्यालय सर्वेक्षण केवल प्रायोगिक कार्य की औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक शिक्षक के रूप में आपके भविष्य की प्रयोगशाला है। जब आप किसी विद्यालय में जाकर वहाँ की भौतिक संरचना,शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, छात्र-शिक्षक अनुपात और सामुदायिक सहभागिता का अवलोकन करते हैं, तभी आप किताबी ज्ञान को जमीनी हकीकत से जोड़ पाते हैं NEP-2020 भी ‘अनुभव आधारित अधिगम’ पर जोर देती है। इसलिए आँख-कान खुले रखिए, प्रश्न पूछिए और सीखिए। याद रखिए, एक अच्छा सर्वेक्षण ही आपको अच्छा शिक्षक बना सकता है।” उन्होंने सर्वेक्षण की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि विद्यार्थियों को पूर्व-निर्धारित प्रारूप पर विद्यालय की आधारभूत संरचना, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान, मध्याह्न भोजन, नामांकन, उपस्थिति और नवाचारों का डेटा एकत्र करना होगा। साथ ही शिक्षकों और प्रधानाचार्य से साक्षात्कार भी लेना होगा। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए कुछ विशिष्ट प्रश्न इस प्रकार रहे-“क्या ग्रामीण और शहरी विद्यालय के सर्वेक्षण प्रारूप में अंतर होगा? यदि हाँ, तो किन बिंदुओं पर?”।”सर्वेक्षण के दौरान यदि कोई विद्यालय हमें डेटा देने से मना कर दे तो हमें क्या करना चाहिए? “क्या हम सर्वेक्षण में ‘समावेशी शिक्षा’ और ‘दिव्यांग बच्चों के लिए सुविधाओं’ को विशेष रूप से देख सकते हैं? NEP-2020 में इस पर जोर है। “फोटो या वीडियो लेना अनुमन्य है या केवल लिखित अवलोकन करना है?” सर्वेक्षण रिपोर्ट में ‘सुझाव’ वाले कॉलम में हम कितने आलोचनात्मक हो सकते हैं?” डॉ शिल्पी डॉ. सिंह ने सभी प्रश्नों के तर्कसंगत उत्तर देते हुए विद्यार्थियों को निष्पक्ष, वैज्ञानिक और नैतिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। इस अवसर पर शिक्षाशास्त्र विभाग के समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विभाग के प्राध्यापक ने किया। अंत में विभागाध्यक्ष ने सभी विद्यार्थियों को सर्वेक्षण कार्य ईमानदारी एवं लगन से पूर्ण करने हेतु शुभकामनाएँ दीं।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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