मुख्य कार्यपालन अधिकारी के आदेश को रखती है जूती के नोक पर जनपद पंचायत की CEO भारती धाकड़

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चेकडैम निर्माण के नाम पर सतेंद्र सिंह ने लाखों निकाल शासन को लगाया चूना

कमीशनखोरी के आरोपों से घिरीं घाटीगांव जनपद CEO भारती धाकड़!की मेहरबानी से सतेंद्र सिंह सचिव खा रहे मलाई

दैनिक केसरीया हिंदुस्तान

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ग्वालियर घाटीगांव बरई ग्राम पंचायत पाटाई अंतर्गत चेक डैम निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की जनपद पंचायत स्तर की निधि से स्वीकृत दो चेक डैम निर्माण कार्यों में भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
1. चेक डैम निर्माण कार्य – सोनू के खेत के पास, ग्राम बरखेड़ा
इस कार्य का वर्क कोड107267951है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पाटाई को प्रथम किस्त के रूप में 5 लाख 27 हजार 600 रुपये का भुगतान 22 अगस्त 2025 को किया गया था। इसके बाद द्वितीय किस्त की मांग के आधार पर जनपद स्तर से 7 लाख 90 हजार 805 रुपये का भुगतान 15 जून 2026 को कार्यपालन अधिकारी भारती धाकड़ के माध्यम से किया गया।
2. चेक डैम निर्माण कार्य – महुआ वाले नाले पर, ग्राम बरखेड़ा
इस कार्य का वर्क कोड107267962है। इस कार्य के लिए भी ग्राम पंचायत पाटाई को प्रथम किस्त के रूप में 5 लाख 27 हजार 600 रुपये का भुगतान 22 अगस्त 2025 को किया गया। वहीं, द्वितीय किस्त के रूप में 7 लाख 90 हजार 805 रुपये का भुगतान 15 जून 2026 को जनपद स्तर से किया गया।
भुगतान प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवाल
दोनों निर्माण कार्यों को लेकर आरोप हैं कि मौके पर निर्माण कार्य दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन नहीं हुआ, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
क्या भुगतान से पहले जियो-टैगिंग (Geo-Tagging), निर्माण स्थल की फोटोग्राफी और तकनीकी सत्यापन कराया गया था? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया था? यदि कार्य पूर्ण नहीं हुए थे, तो फर्जी बिल-वाउचर के आधार पर राशि का भुगतान कैसे किया गया?
यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि बिना आवश्यक फोटो एवं भौतिक सत्यापन क्या ? कथित 5 प्रतिशत कमीशन के आधार भारती धाकड़ जनपद सीईओ ने भुगतान किया गया।
अब प्रमुख सवाल यह है कि दोनों चेक डैम निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति बने ही नहीं गए फिर मैडम साहिबा ने राशि कैसे जारी की है भारतीय धाकड़ कर पालन अधिकारी जनपद पंचायत घाटीगांव ने भुगतान की स्वीकृति किस के कहने से दी और बिना मौके पर निर्माण कार्य हुए सरकारी राशि कैसे जारी की गई?
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर भुगतान से संबंधित दस्तावेज, मस्टर रोल, बिल-वाउचर, जियो-टैग फोटो, तकनीकी स्वीकृति एवं मूल्यांकन रिपोर्ट की जांच कराई जाना आवश्यक है। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्वालियर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ के आदेशों पर नहीं करती कर्यवाही जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

 ग्वालियर जिले की घाटीगांव जनपद पंचायत इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। यहां पदस्थ कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) भारती धाकड़ की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला शिकायतों पर जांच और जिला पंचायत कार्यालय द्वारा जारी निर्देशों के पालन से जुड़ा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत से संबंधित विभिन्न शिकायतें जब जिला पंचायत कार्यालय तक पहुंचती हैं, तो उन पर जांच दल गठित किया जाता है। जिला पंचायत कार्यालय द्वारा संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर सात दिवस के भीतर जांच एवं आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि इन निर्देशों के बावजूद कई मामलों में वर्षों बीत जाने तक जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत कार्यालय तक क्यों नहीं पहुंच पाता?
हैरानी की बात यह है कि संबंधित मामलों में जांच कब हुई, किस अधिकारी ने जांच की और यदि जांच नहीं हुई तो इसके पीछे क्या कारण रहे, इसकी स्पष्ट जानकारी तक उपलब्ध नहीं होने के सवाल सामने आ रहे हैं।
वहीं, आम नागरिक अपनी समस्याओं और शिकायतों को लेकर कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में आवेदन प्रस्तुत करते हैं। इन आवेदनों पर समयबद्ध कार्रवाई करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। लेकिन यदि शिकायतों पर कार्रवाई के लिए जारी पत्रों और निर्देशों का ही पालन नहीं होता, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा?
अब सवाल यह भी उठता है कि कलेक्टर ग्वालियर श्रीमती रुचिका चौहान एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी क्या समय-समय पर उन पत्रों की समीक्षा करते हैं, जिन्हें कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को मार्क किया जाता है? कितने पत्रों पर कार्रवाई हुई? कितने मामलों में जांच पूरी हुई? कितने जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किए गए और कितने मामले आज भी लंबित हैं? यदि प्रतिवेदन नहीं मिले तो संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब क्यों नहीं किया गया?
कल हम इस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों, शिकायतों और दस्तावेजों के साथ कुछ और महत्वपूर्ण सवाल आपके सामने रखेंगे।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जनपद पंचायत घाटीगांव की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।
हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि आदिवासी, पिछड़े और दलित वर्ग के जरूरतमंद लोगों को न्याय मिल सके तथा घाटीगांव जनपद पंचायत एक सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह पंचायत के रूप में स्थापित हो सके।

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