2026 में 26 वें राज्य 36 गढ़ का 26 वां राज्योत्सव – एक नई उड़ान
दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
छत्तीसगढ़ भारत का 26वां राज्य छत्तीसगढ़, 2026 में अपनी स्थापना की 26वीं वर्षगांठ मना रहा है। छत्तीसगढ़ की यह 26 वर्षों की यात्रा केवल एक नए राज्य के निर्माण की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास, संस्कृति और संभावनाओं के निरंतर विस्तार का जीवंत दस्तावेज है। सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद राज्य ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
नक्सलवाद पर नकेल : शांति की ओर बढ़ते कदम
लंबे समय तक नक्सलवाद राज्य के विकास की सबसे बड़ी बाधा रही। अब सरकार के सार्थक प्रयासों से प्रभावित क्षेत्रों में शांति लौट रही है। यह 26 वर्षों की विकास यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक है। शांति और सुरक्षा का मजबूत वातावरण शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दे रहा है।
खनिज और वन संपदा : विकास की प्राकृतिक पूंजी
छत्तीसगढ़ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और चूना पत्थर जैसे खनिजों से समृद्ध है। विशाल वन क्षेत्र, लघु वनोपज और जैव विविधता राज्य की आर्थिक शक्ति हैं। खनिज आधारित उद्योगों को स्थानीय रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़कर अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी जा सकती है।
कृषि : ‘धान का कटोरा’ से समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर
यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए धान के साथ दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना समय की मांग है। क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था जितनी मजबूत होगी, छत्तीसगढ़ उतना सशक्त होगा।
शिक्षा और नवाचार : भविष्य का आधार
पिछले 26 वर्षों में विद्यालयों, महाविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार हुआ है। अब आवश्यकता शिक्षा को रोजगार, कौशल और नवाचार से जोड़ने की है। छत्तीसगढ़ के युवा देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर मिले तो यही युवा विकास के सबसे बड़े वाहक बनेंगे।
सांस्कृतिक विरासत : हमारी आत्मा
लोक संस्कृति, लोकगीत, पंडवानी, रामायण-मानस परंपरा, ग्राम्य मेले, हस्तशिल्प और आदिवासी जीवनशैली छत्तीसगढ़ की आत्मा हैं। पद्म विभूषण तीजन बाई ने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाया। कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, राजिम का त्रिवेणी संगम, सिरपुर की बौद्ध विरासत, भोरमदेव की स्थापत्य कला, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी परंपरा और बस्तर की आदिवासी संस्कृति हमारी बहुरंगी विरासत को दर्शाते हैं।
पर्यटन : अपार संभावनाओं का द्वार
चित्रकोट-तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी, सिरपुर, भोरमदेव, राजिम, चंदखुरी और बस्तर जैसे क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। पर्यटन को स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और खान-पान से जोड़कर हजारों परिवारों के लिए आय का साधन बनाया जा सकता है।
फिल्म सिटी : छत्तीसगढ़ की नई उड़ान
राज्य में प्रस्तावित फिल्म सिटी एक बहुउद्देशीय अभिनव पहल है। इससे यहां की युवा शक्ति और कला साधकों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई उड़ान भरने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का संकल्प
छत्तीसगढ़ के पास प्राकृतिक संसाधन हैं, मेहनती किसान हैं, प्रतिभाशाली युवा हैं और समृद्ध संस्कृति है। आवश्यकता इन सभी शक्तियों को एक दिशा में जोड़ने की है। विकास तब सार्थक होगा जब अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, बिजली, पानी और सम्मानजनक जीवन पहुंचेगा।
सार : 26 वर्षों की यह यात्रा उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों की रही है। अब लक्ष्य केवल विकास की गति बढ़ाना नहीं, बल्कि संतुलित, समावेशी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास है। खनिज हमारी आर्थिक शक्ति, वन हमारी प्राकृतिक पूंजी, किसान हमारी खाद्य सुरक्षा, युवा हमारी ऊर्जा और संस्कृति हमारी पहचान है।
राज्योत्सव के इस पावन अवसर पर संकल्प लें कि हम प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे, सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाएंगे और छत्तीसगढ़ को शिक्षा, रोजगार, उद्योग, कृषि, संस्कृति व पर्यटन में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने हेतु सामूहिक प्रयास करेंगे।
26 वर्षों का यह पड़ाव अंत नहीं, बल्कि नई संभावनाओं की शुरुआत है।
राज्योत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
— डॉ. मुन्नालाल देवदास
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कृत सेवानिवृत्त प्रधान पाठक, नवाचारी शिक्षाविद, गीतकार एवं साहित्यकार
नगर पंचायत कोपरा, जिला गरियाबंद, छत्तीसगढ़
मो. 9993644766






