ग्राम पंचायतों में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर उठे सवाल, सचिव की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान; जनपद से जिला पंचायत तक जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल।
. ग्राम पंचायत पाटई पंप चालक को 21 हजार रुपये का भुगतान, खर्च का विवरण गायब
ग्राम पंचायत पाटई में सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध खर्च वाउचर के अनुसार, दिनांक 03/06/2026 को पंप चलाने वाले व्यक्ति के नाम पर 21 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। वाउचर में पंजाब नेशनल बैंक का खाता क्रमांक पार्टी के रूप में दिखाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पंप चालक को किस कार्य के लिए एकमुश्त 21 हजार रुपये दिए गए। क्या यह वेतन था या किसी अन्य कार्य का भुगतान? वाउचर में इसका कोई स्पष्ट विवरण नहीं है। ऐसे में सरकारी राशि के भुगतान की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
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*ग्राम पंचायत पाटई: सरपंच के नाम पर 3 हजार रुपये का मानदेय, भुगतान का हिसाब स्पष्ट नहीं*
ग्राम पंचायत पाटई में दूसरा मामला सामने आया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, दिनांक 07/06/2026 को सरपंच के नाम पर 3 हजार रुपये मानदेय के रूप में भुगतान दर्शाया गया है। सवाल यह है कि क्या सरपंच का निर्धारित मानदेय वास्तव में 3 हजार रुपये है? यदि भुगतान किया गया है तो किस खाते में राशि भेजी गई और इसका पूरा विवरण रिकॉर्ड में क्यों स्पष्ट नहीं है? इस भुगतान को लेकर भी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठ रही है।
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
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*संजय कुमार जाटव: 5 हजार रुपये का भुगतान, सरपंच के हस्ताक्षर और ट्रांजैक्शन आईडी गायब*
तीसरे मामले में संजय कुमार जाटव के नाम पर दिनांक 09/08/2026 को 5 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। बताया गया है कि यह भुगतान फोटो कॉपी के बिल के आधार पर ई-पेमेंट के माध्यम से किया गया। हैरानी की बात यह है कि उपलब्ध बिल में कार्य का विवरण भी काटा हुआ दिखाई दे रहा है। साथ ही बिल पर सरपंच के हस्ताक्षर भी नजर नहीं आ रहे हैं। सवाल यह है कि बिना सरपंच के हस्ताक्षर के भुगतान किस आधार पर किया गया? यदि भुगतान ई-पेमेंट से हुआ तो ई-पेमेंट क्रमांक और ट्रांजैक्शन आईडी का उल्लेख क्यों नहीं है?
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
4. *ग्राम पंचायत: जितेंद्र सिंह को मोटर के कार्य के नाम पर 10 हजार रुपये का भुगतान, हस्ताक्षर गायब*
चौथे मामले में जितेन्द्र सिंह पिता सोनेराम के नाम पर दिनांक 09/08/2026 को पानी की मोटर निकलवाने, दोबारा डलवाने और मरम्मत कराने के नाम पर 10 हजार रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। सवाल यह है कि क्या नई मोटर खरीदी गई थी या पुरानी मोटर में मरम्मत अथवा नए उपकरण लगाए गए थे? यदि मरम्मत कराई गई तो उसका विस्तृत बिल और कार्य का विवरण कहां है? उपलब्ध दस्तावेज में सरपंच के हस्ताक्षर भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया और उसकी स्वीकृति पर सवाल उठ रहे हैं।
बिल क्रमांक: उपलब्ध कराए जाने पर दर्ज किया जाएगा।
*जनपद से जिला पंचायत तक जांच की मांग*
इन चारों मामलों में भुगतान के दस्तावेजों, बिलों, सरपंच के हस्ताक्षरों, बैंक खातों और ई-पेमेंट ट्रांजैक्शन की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। यदि किसी भी स्तर पर सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायतों में सरकारी धन के खर्च की निगरानी कौन कर रहा है? क्या जनपद पंचायत और जिला पंचायत के अधिकारियों ने इन भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच की है?
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन मामलों की जांच कराते हैं या फिर सरकारी धन के भुगतान में उठ रहे सवालों को यूं ही अनदेखा किया जाता रहेगा।