​रीवा में ‘आबकारी सिंडिकेट’ की खुली डकैती; क्या ‘सूर्यवंशी’ का तेज रोक पाएगा ठेकेदारों की मनमानी ?

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भूपेंद्र सिंह दैनिक केसरिया हिंदुस्तान
​ रीवा। रीवा में ‘आबकारी सिंडिकेट’ के हौसले बुलंद हैं। जिले के कोने-कोने में शराब ठेकेदारों द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली का खेल धड़ल्ले से जारी है। इसे ‘खुली डकैती’ कहें या प्रशासन की लाचारी, लेकिन हकीकत यही है कि आम आदमी की जेब पर दिन-दहाड़े डाका डाला जा रहा है। ऐसे में अब सबकी निगाहें नए नवागत कलेक्टर और कड़े प्रशासनिक तेवरों के लिए जाने जाने वाले अधिकारियों पर टिकी हैं क्या ‘सूर्यवंशी’ का तेज इस काले साम्राज्य को भस्म कर पाएगा? ​
सिंडिकेट का ‘अघोषित’ कानून
​जिले की शराब दुकानों पर एमआरपी महज एक कागजी आंकड़ा बनकर रह गई है। सूत्रों की मानें तो प्रत्येक बोतल पर 50 से 100 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली की जा रही है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, सिंडिकेट ने अपना एक समानांतर तंत्र खड़ा कर लिया है। यदि कोई ग्राहक विरोध करता है, तो दुकानों पर तैनात निजी ‘बाउंसर’ और लठैत उसे डराने-धमकाने से बाज नहीं आते।
*​प्रशासनिक ‘चुप्पी’ पर उठते सवाल*
​हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग के नाक के नीचे यह सब हो रहा है, फिर भी कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ​शिकायत करने के बावजूद मौके पर कोई अधिकारी नहीं पहुँचता। ​सिंडिकेट के रसूख के आगे स्थानीय पुलिस भी मौन साधे रहती है। ​अवैध अहातों और सार्वजनिक स्थलों पर मद्यपान ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दे दी है।
​ *क्या सूर्यवंशी का ‘हंटर’ चलेगा?*
​ सख्त छवि वाले अधिकारियों से जनता को काफी उम्मीदें हैं। ‘सूर्यवंशी’ तेवर यानी वह प्रशासनिक कड़ाई, जो रसूखदारों के आगे नहीं झुकती। चर्चा जोरों पर है कि क्या प्रशासन इन ठेकेदारों के गठजोड़ को तोड़ पाएगा?
​”जब तक बड़े सिंडिकेट पर आर्थिक दंड के साथ-साथ लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ये ‘डकैती’ रुकने वाली नहीं है। अब देखना यह है कि प्रशासन का ‘तेज’ इन ठेकेदारों की मनमानी पर भारी पड़ता है या सिंडिकेट का प्रभाव।
*​जनता की मांग: पारदर्शी व्यवस्था*
​रीवा की जनता अब सोशल मीडिया और जनसुनवाई के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रही है। मांग सिर्फ इतनी है कि शराब दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा हो और रेट से अधिक वसूली करने वालों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

Dainik kesariya Hindustan
Author: Dainik kesariya Hindustan

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