केसरिया हिन्दुस्तान से रघुनाथ सेन
धार धार पीथमपुर स्थित नेट्रेक्स (NATRAX) ऑटो टेस्टिंग ट्रैक परिसर में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। वन मंडल अधिकारी, धार श्री विजयानंथम टी. आर. के कुशल मार्गदर्शन में ‘अफ्रीकन बोमा पद्धति’ का उपयोग कर नीलगायों को सुरक्षित रेस्क्यू करने का अभियान सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है।
ऑपरेशन की मुख्य विशेषताएँ:
रणनीति और तकनीक: रेस्क्यू ऑपरेशन की विस्तृत कार्ययोजना दिनांक 13 अप्रैल को तैयार की गई थी। इसके अंतर्गत नीलगायों को बिना किसी शारीरिक हानि पहुँचाए पकड़ने के लिए विश्व प्रसिद्ध ‘बोमा तकनीक’ (Enclosure Technique) का चयन किया गया।
उद्देश्य: वन विभाग की यह पहल न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) को कम करने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि नेट्रेक्स जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। विभाग द्वारा जानकारी दी गई है कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन आगामी दिनों में भी निरंतर जारी रहेगा।
सफलतापूर्ण स्थानांतरण: अभियान के पहले दिन (14 अप्रैल) को 10 नीलगाय और दूसरे दिन (15 अप्रैल) को 15 नीलगाय, इस प्रकार कुल 25 नीलगायों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया है।
संयुक्त टीम वर्क: इस जटिल ऑपरेशन में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व और वन मंडल राजगढ़ के विशेषज्ञों सहित रालामंडल अभयारण्य के रेस्क्यू दल ने सहभागिता की।
सराहनीय योगदान: इस अभियान की सफलता में उप वन मंडल अधिकारी श्री सुनील सुलिया, वन परिक्षेत्र अधिकारी (मांडव) श्री सचिन सयदे, सुश्री संगीता रावत (धामनोद), श्री अजय चौहान, श्री आशीष सिंह सिकरवार एवं धार वन मंडल के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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