दैनिक केसरिया हिंदुस्तान जिला सिवनी ब्यूरो चीप
सिवनी के बरघाट से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया है जिस लोकतंत्र में जनता अपना प्रतिनिधि चुनती है उसी लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है ग्राम पंचायत नागझिर में जनता ने भरोसा जताया परमिला टेमरे पर उन्हें सरपंच की कुर्सी सौंपी लेकिन आज उस कुर्सी पर पुत्र मोह और सत्ता का नशा हावी है गायब सरपंच और अदृश्य सचिव भ्रष्टाचार का त्रिकोण
ग्रामीणों के बीच हाहाकार मचा है क्योंकि नागझिर पंचायत में सिस्टम पूरी तरह कोलैप्स हो चुका है पुत्र बना सुपर सरपंच आरोप है कि पिछले दो साल से सरपंच की कुर्सी पर उनके बेटे अरुण का अनधिकृत कब्जा है महिला सरपंच घर की चारदीवारी तक सीमित हैं और बेटा पंचायत के फैसले ले रहा है ताले में बंद विकास: ग्रामीण काम के लिए पंचायत जाते हैं तो दफ्तर पर ताला लटका मिलता है सरपंच के घर जाओ तो बेटा मिलता है जो खुद को ही ‘सरकार’ समझ बैठा है लापता सचिव पंचायत सचिव का आलम यह है कि वे ‘ईद के चांद हो गए हैं सरकारी तनख्वाह जेब में लेकिन जनता के कामों के लिए उनके पास वक्त नहीं है कागजों पर दौड़ा विकास हकीकत में कंगाल नागझिर यह सिर्फ पद का दुरुपयोग नहीं बल्कि करोड़ों के घोटाले की बू है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि फर्जी बिलों का खेल जमीन पर ईंट भी नहीं लगी और कागजों पर विकास की गंगा बह गई मिलीभगत का नेक्सस सरपंच पुत्र सचिव और भ्रष्ट ठेकेदारों ने मिलकर सरकारी खजाने को अपनी जागीर बना लिया है विकास शून्य गलियां बदहाल हैं नालियां चोक हैं लेकिन भ्रष्टाचार के बिल धड़ाधड़ पास हो रहे हैं अब दिल्ली-भोपाल डोलेगा जनता ने भरी हुंकार नागझिर की जनता अब सहने को तैयार नहीं है ग्रामीणों ने आर पार की जंग का ऐलान कर दिया है हम चुप नहीं रहेंगे सबूत जुटा लिए गए हैं अब सीधे भोपाल में ग्रामीण विकास मंत्री का दरवाजा खटखटाएंगे। लूट की एक-एक पाई का हिसाब होगाआक्रोशित ग्रामीण सीधा प्रहार प्रशासन की चुप्पी पर सवाल क्या जनपद और जिला प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी है क्या अधिकारियों को नहींदिख रहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर बेटा राज चल रहा है कब होगी इस भ्रष्टाचार के नेक्सस पर सर्जिकल स्ट्राइक जिला पंचायत सिवनी की जनपद पंचायत बरघाट अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नागझिर में इन दिनों लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है ग्रामीणों के अनुसार पंचायत चुनाव में जनता ने परमिला टेमरे को सरपंच चुना था लेकिन हकीकत में पंचायत की कमान किसी और के हाथों में दिखाई दे रही है
सूत्रों से मिली जानकारी और ग्रामीणों के आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों से पंचायत की कुर्सी पर महिला सरपंच की जगह उनका पुत्र अरुण बैठकर फैसले लेता नजर आता है जब भी ग्रामीण किसी काम से पंचायत पहुंचते हैं तो कार्यालय अक्सर बंद मिलता है और जब सरपंच के घर संपर्क किया जाता है तो वहां भी महिला सरपंच नहीं बल्कि उनका पुत्र ही जवाब देता दिखाई देता है
Author: Dainik kesariya Hindustan
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