रिपोर्टर दिलीप माहेश्वरी
अरदास के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस, फास्ट ट्रैक कोर्ट से शीघ्र न्याय की मांग
9 साल बाद भी फैसला लंबित, परिवार बोला—“तारीख पर तारीख, कब मिलेगा इंसाफ?”
बलौदाबाजार। बहुचर्चित निक्कू सलूजा हत्याकांड की 9वीं बरसी पर गुरुवार को गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में पीड़ित परिवार एवं सिख समाज द्वारा अरदास का आयोजन किया गया। अरदास के पश्चात आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवार ने एक बार फिर न्याय की गुहार लगाते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से शीघ्र फैसला और मुआवजे की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीड़ित परिवार ने कहा कि 9 अप्रैल 2017 को हुई इस घटना को आज 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक न्यायालय से अंतिम निर्णय नहीं आया है। परिवार ने आरोप लगाया कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कारण उन्हें “तारीख पर तारीख” मिल रही है। परिजनों के अनुसार, वे हर पेशी पर सुबह 12 बजे से शाम 5 बजे तक कोर्ट में बैठते हैं, हस्ताक्षर करते हैं और बिना किसी ठोस प्रगति के वापस लौट आते हैं।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मामले के सभी आरोपी पुलिसकर्मी जमानत पर बाहर हैं और पुनः पुलिस विभाग में ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार आज भी मानसिक और सामाजिक पीड़ा झेल रहा है।
मदुरै फैसले का स्वागत, यहां भी सख्त कार्रवाई की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिख समाज और परिवार ने तमिलनाडु के मदुरै कोर्ट द्वारा पुलिस कस्टडी में हत्या के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड दिए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सख्त निर्णय न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करते हैं और बलौदाबाजार के इस मामले में भी इसी प्रकार की त्वरित और कठोर कार्रवाई की अपेक्षा है।
घटना की पृष्ठभूमि: ट्रैफिक विवाद से कस्टोडियल डेथ तक
उल्लेखनीय है कि 9 अप्रैल 2017 को ट्रैफिक चेकिंग के दौरान निक्कू सलूजा को पुलिस ने रोका था। विवाद के बाद उन्हें कोतवाली थाना ले जाया गया, जहां उनकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
तत्कालीन रिपोर्ट्स के अनुसार, परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया था, जिसके बाद शहर में व्यापक आक्रोश, चक्काजाम, मौन रैली और विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रशासन ने उस समय 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर हत्या का मामला दर्ज किया था।
“हमें सिर्फ न्याय चाहिए” — काजल
मृतक की पुत्री काजल ने मीडिया से कहा—
“मेरे पिता के हत्यारे पुलिसकर्मी धीरज मरकाम, लोमेश साहू, संदीप साहू, लीला साहू, आशुतोष बंजारे और गंगाराम यादव हैं। हमारी सिर्फ एक ही मांग है कि सभी आरोपियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिले।”
सिख समाज और परिवार एकजुट
इस अवसर पर पीड़ित परिवार—
दविंदर कौर (माता), सुनीता कौर (पत्नी), काजल, सोनम, सुजल सिंह सहित
सिख समाज के अध्यक्ष सरदार इंदर सिंह सलूजा, पार्षद राजू सलूजा, निर्मल सिंह सलूजा एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में मांग की कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर शीघ्र न्याय दिलाया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।निक्कू सलूजा हत्याकांड आज भी न्याय व्यवस्था की धीमी गति का प्रतीक बना हुआ है। 9 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भी यदि पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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