झोखो पंचायत में पानी के लिए तरसते ग्रामीण पीएचई विभाग की लापरवाही उजागर, मजबूरी में गोपद नदी का पानी पी रहे लोग, आंगनबाड़ी केंद्र भी प्रभावित
सिंगरौली । विकासखंड चितरंगी के ग्रामीण अंचलों में हर साल गर्मी के साथ जल संकट गहराता है, लेकिन इस बार स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत भी उजागर कर दी है। ग्राम पंचायत झोखो में एक हैंडपंप पिछले एक साल से खराब पड़ा हुआ है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि साहू बस्ती सहित आसपास के लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं और मजबूरी में गोपद नदी का दूषित पानी पीने को विवश हैं।
चितरंगी क्षेत्र का भौगोलिक स्वरूप पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहा है। जंगल, पहाड़ और उबड़-खाबड़ रास्तों के बीच बसे गांवों में गर्मी के मौसम में जलस्तर तेजी से नीचे चला जाता है। इसका सीधा असर पेयजल स्रोतों पर पड़ता है, जहां हैंडपंप पानी देने के बजाय हवा उगलने लगते हैं। लेकिन झोखो पंचायत का मामला सिर्फ प्राकृतिक समस्या नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभाग की घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।
ग्राम पंचायत झोखो के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-3, कोलन बस्ती और हनुमान मंदिर के पास (एनएच रोड) स्थित हैंडपंप पिछले एक साल से पूरी तरह बंद पड़ा है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक इस हैंडपंप की मरम्मत नहीं कराई गई। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के चलते स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग केवल कागजों में सक्रिय नजर आता है। जब तक मामला मीडिया या जनप्रतिनिधियों के माध्यम से उजागर नहीं होता, तब तक अधिकारी मौके पर झांकने तक नहीं आते। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस हैंडपंप के खराब होने से आंगनबाड़ी केंद्र भी प्रभावित हो रहा है। यहां आने वाले छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पीने के पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है। कई बार उन्हें नदी का पानी इस्तेमाल करना पड़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में कुपोषण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
साहू बस्ती के ग्रामीणों ने बताया कि अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। गोपद नदी का पानी ही एकमात्र सहारा है, जबकि यह पानी साफ-सफाई के लिहाज से सुरक्षित नहीं है। बरसात के बाद नदी में गंदगी और कीचड़ की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य अशोक सिंह पैगाम ने क्षेत्र का दौरा कर वास्तविक हालात का जायजा लिया। उन्होंने माना कि झोखो पंचायत में जल संकट बेहद गंभीर है और तत्काल समाधान की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को अवगत कराते हुए जल्द से जल्द हैंडपंप की मरम्मत कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल एक हैंडपंप तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। लेकिन झोखो का मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि यहां आंगनबाड़ी केंद्र और घनी आबादी इससे सीधे प्रभावित हो रही है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द हैंडपंप को चालू किया जाए और स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पाता। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यदि समय रहते विभाग सक्रिय हो जाए और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करे, तो ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
फिलहाल झोखो पंचायत के ग्रामीण प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और कब तक इस हैंडपंप की मरम्मत कर ग्रामीणों को राहत मिल पाती है, या फिर यह मामला भी अन्य समस्याओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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