धार से सरिता पाटीदार
मनावर ( निप्र):–
परिवार में संवाद की कमी आज की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। खासकर बेटियों के साथ माता, भाभी, बड़ी बहन, बुआ और मौसी का खुला संवाद लगभग खत्म सा हो गया है।
जिस उम्र में एक नवयुवती सबसे ज्यादा झंझावात महसूस करती है, उसी समय उसे समझ, सहारा, मार्गदर्शन और संभाल की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जब यह सब घर में नहीं मिल पाता, तो परिणाम बहुत भयानक भी हो सकते हैं।
समाजसेविका रितु शर्मा ने आगे बताया कि बालिकाएं तब अपने मन की बातें परिवार के बाहर दोस्तों को बताने लगती हैं और कई बार उन्हें अपना घनिष्ठ राजदार बना लेती हैं। इससे वे गलत रास्ते पर भी चली जाती हैं। यही स्थिति बालकों के साथ भी हो रही है।
पहले परिवार में पिता, बड़ा भाई और काका-ताऊ जैसे रिश्तेदार बच्चों के बहुत करीब हुआ करते थे। वे उन्हें साहस, धैर्य और सही मार्गदर्शन देते थे। इससे नई पीढ़ी मजबूत और संतुलित बनती थी।
लेकिन आज परिवार एकल (Nuclear) हो गए हैं। छोटे बच्चे अब दादा-दादी की कहानियां सुनने से वंचित रह जाते हैं। और सबसे महत्वपूर्ण — 13 से 25 साल की उम्र में जिस परिवार के साथी की उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वो भी नहीं मिल पाता।
समाधान क्या है?
अगर परिवार एकल है, तो माता-पिता को जरूर अपने बच्चों के पास बैठना चाहिए। उनकी उम्र का साथी बनकर उनके साथ खेलना, हंसना-मजाक करना, उनकी बातें ध्यान से सुनना और उनके मन की बात समझना चाहिए।
जिससे यदि बच्चा गलत दिशा में जा रहा हो, तो समय रहते आप उसे संभाल सकें और सही राह दिखा सकें।
Author: Dainik kesariya Hindustan
सिर्फ खबरों से संबंधित ही संपर्क करें सम्पादक अशोक सोनी 9009601101 जुड़ने के लिए सम्पर्क करे प्रबंधक उजाला 8602385387 खबरों के लिए सम्पर्क करे दीपेश माहौर 8463846949







