*उदय सुरेशभाई ठक्कर*
*(उदय ठक्कर मुंबई)* कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स कैट के एवं महाराष्ट्र चेंबर कॉमर्स इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (मासिया) के श्री उदय सुरेश भाई ठक्कर ने कहा किसान और व्यापारी भाइयो मार्च के मध्य से ही उत्तर, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम के बदलते मिजाज ने रबी की फसलों, खासकर गेहूं के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जहां तेज हवाओं के साथ हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया के मुताबिक, देश के उन 9 प्रमुख राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, गुजरात, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर—में इसका असर ज्यादा है जहाँ गेहूं की पैदावार और खरीद सबसे अधिक होती है। इन राज्यों के लगभग 111 जिलों से आंधी-बारिश के कारण फसल खराब होने की खबरें मिली हैं, और आशंका जताई जा रही है कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में गेहूं का उत्पादन 10 से 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
इस बार गेहूं की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे कुछ इलाकों में 25-30 प्रतिशत तक दाना बदरंग या बिना चमक का हो सकता है और ऐसे गेहूं के दाम बाजार में कम रह सकते हैं, जिसके चलते अच्छी क्वालिटी वाले गेहूं की मांग और मज़बूत होने की उम्मीद है। उत्पादन की बात करें तो घरेलू उद्योग और व्यापार जगत ने 2025-26 के रबी सीजन के लिए जो अनुमान पहले 1150 लाख टन लगाया था, वह अब घटकर करीब 1130 लाख टन रह सकता है। फिलहाल मंडियों में गेहूं का थोक भाव 2300-2400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रहा है और व्यापारी इसी रेट पर खरीदारी भी कर रहे हैं, वहीं अगर निर्यात की बात करें तो मौजूदा कीमतों पर बांग्लादेश को गेहूं भेजना फायदेमंद लग रहा है, लेकिन अगर मंडी भाव गिरकर 2250-2300 रुपये तक आ जाए तो अन्य देशों को भी निर्यात करना संभव हो पाएगा और कमोबेश यही स्थिति गेहूं से बने अन्य उत्पादों के साथ भी बनी हुई है।
Author: Dainik kesariya Hindustan
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